सूरत

मां की जुदाई को सह नहीं पाई नन्ही शेरनी, कह गई हमेशा के लिए अलविदा..

मां की कोख से जन्म लेने के बाद उसकी रुसवाई और जुदाई का छह दिन की मादा शावक को इतना गहरा सदमा लगा कि उसकी मौत हो गई। बीती रात नन्ही शेरनी के दम तोडऩे के बाद सज्जनगढ़ बायोलोजिकल पार्क में बब्बर शेर श्याम और महक का आंगन फिर सूना हो गया।

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Dec 21, 2016
cub

मां की कोख से जन्म लेने के बाद उसकी रुसवाई और जुदाई का छह दिन की मादा शावक को इतना गहरा सदमा लगा कि उसकी मौत हो गई। बीती रात नन्ही शेरनी के दम तोडऩे के बाद सज्जनगढ़ बायोलोजिकल पार्क में बब्बर शेर श्याम और महक का आंगन फिर सूना हो गया। शावक के पैदा होने के बाद से शेरनी उससे दूर हो गई थी और अमरीका से आयातित दूध पिलाकर उसको जीवित रखने के प्रयास किए जा रहे थे। बायो पार्क के विकसित होने के तीन वर्ष बाद नन्हे मेहमान के आगमन ने सबको बड़ी खुशी दी थी, लेकिन मादा शावक के आंख मूंदने से कर्मचारियों को भी गहरा आघात पहुंचा। मौत की खबर से उसकी सेवा में लगे चिकित्सक डॉ. हिमांशु व्यास व केयरटेकर रामसिंह तक का गला भर आया। बाद में शीर्ष अफसरों को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवा कर मंगलवार सुबह उसकी अंत्येष्टि पार्क में ही कर दी गई। विशेषज्ञों की मानें तो महक (शेरनी) का पहला प्रसव था और शेरों के कुनबे में इस तरह की घटनाएं आम हैं। जोधपुर के माचिया बायो पार्क में भी दो शावक की इसी तरह से मौत हुई थी। उल्लेखनीय है कि बायो पार्क में गत 14 दिसम्बर को मादा शावक का जन्म हुआ था।

सुबह पता चला

सूत्रों के अनुसार रात करीब तीन बजे चिकित्सक व्यास ने शावक को दूध पिलाया। उसके आराम की मुद्रा में आने के बाद वे अपने कमरे में आ गए। इस दौरान सीसीटीवी कैमरे से देखा तो मादा शावक ने सामान्य तरीके से पेशाब किया और थोड़ी देर बाद सो गई। सुबह शावक के नहीं उठने पर हिलाकर देखा तो कोई हलचल नहीं मिली। उन्होंने तत्काल शावक को हाथ में लिया और मालिश की। लेकिन उसने दम तोड़ दिया था। पशु चिकित्सालय में डॉ. शरद अरोड़ा, हिमांशु व्यास व डॉ. करमेन्द्र प्रताप ने पोस्टमार्टम किया। शावक के शरीर के अन्य भाग ठीक थे और पेट भी भरा था। लेकिन मौत का कारण सदमा लगना बताया गया।

मां के दूर होना मौत का बड़ा कारण

चिकित्सकों ने बताया कि बच्चों के जन्म के बाद उनकी मां उन्हें छोड़ देती हैं हो तो उनकी हालत खराब हो जाती है। इससे शावक सदमे में चले जाते हैं और अधिकांश मामलों में उनकी मौत हो जाती है। ऐसा जंतुआलय ही नहीं जंगल में भी होता है।

आगे : फिर किलकारी गूंजने की उम्मीद

वन्यजीव चिकित्सकों ने उम्मीद जताई कि पहले प्रसव के बाद शेरनी बच्चे से दूर हो जाती है तो वह वापस गर्भधारण करती है। डॉक्टरों ने बताया कि करीब 130 दिन में शेरनी फिर मां बनती है। पिछले दिनों जोधपुर के माचिया बायो पार्क में जन्म देकर दूर हुई मां ने इसी अवधि में फिर शावक को जन्म दिया।

Published on:
21 Dec 2016 12:14 pm
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