उदयपुर

यहां डॉक्टर के घर के सामने लगी मृतक की अर्थी, अब कमेटी तीन दिन में करेगी मामले की जांच

सलूंबर. बीती रात यहां सामान्य चिकित्सालय से रेफर मरीज ने उदयपुर ले जाते समय दम तोड़ दिया।

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Nov 05, 2017

सलूंबर. बीती रात यहां सामान्य चिकित्सालय से रेफर मरीज ने उदयपुर ले जाते समय दम तोड़ दिया। उसे पेट दर्द की शिकायत थी। शनिवार सुबह परिजन अर्थी लेकर रेफर करने वाले चिकित्सक के घर पहुंच गए। बिना प्राथमिक उपचार रेफर करने का आरोप लगाते हुए भीड़ ने पांच घंटे हंगामा किया। प्रशासनिक अधिकारियों के दखल और समझाने पर मामला शांत हुआ। जिला कलक्टर ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।


कस्बे में भाया बापू की गली निवासी मनोज (28) पुत्र रामचंद्र लक्षकार को शुक्रवार देर रात पेट होने पर सामान्य चिकित्सालय लाया गया। परिजन उसे प्रभारी डॉ. जयलाल बडग़ुर्जर के क्वार्टर पर ले गए। आरोप है कि बिना प्राथमिक उपचार मनोज को उदयपुर के लिए रेफर कर दिया गया। परिजन उसे लेकर अस्पताल से चुंगीनाका तक पहुंचे ही थे कि मनोज ने दिया। परिजन उसे कस्बे के ही निजी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सक मृत घोषित कर दिया। आक्रोशित परिजन रात को ही थाने गए, जहां रिपोर्ट दी।
सुबह होते ही परिजन व कस्बे के लोग अर्थी लेकर डॉ. बडग़ुर्जर के क्वार्टर पर जा पहुंचे। ये सभी अर्थी को दहलीज पर रखने के साथ दाह संस्कार पर अड़ गए।

सूचना पर पुलिस व प्रशासन के अधिकारी पहुंचे, जिन्होंने बमुश्किल समझाकर दोपहर करीब दो बजे अंतिम यात्रा को श्मशान घाट के लिए रवाना किया। इससे पहले परिजनों के इनकार पर पोस्टमार्टम भी नहीं करवाया गया। मौके एएसपी बींजाराम मीणा, सराड़ा डीएसपी नारायणसिंह, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. राघवेन्द्र राव, तहसीलदार डायालाल पाटीदार, सलूंबर थानाधिकारी शैलेन्द्रसिंह, झल्लारा थानाधिकारी नागेन्द्रसिंह जाप्ता समेत तैनात रहे। एडीएम सी.आर. देवासी व सीएमएचओ डॉ. संजीव टांक भी पहुंचे।


डॉक्टर घर में कैद, बाहर अंतिम संस्कार के लिए महिलाएं ले आईं लकडिय़ां

हंगामे के दौरान डॉ. बडग़ुर्जर अपने ही घर में कैद हो गए। दहलीज पर अर्थी के पास मृतक के परिजनों का विलाप और भीड़ का आक्रोश था। ये सभी वहीं अंतिम संस्कार पर आमादा थे, इसलिए कुछ महिलाएं हाथ ठैले पर बड़ी मात्रा में लकडिय़ां भी ले आईं। इससे पहले कि ऐसा कुछ होता, पुलिस-प्रशासन ने हालात संभाल लिए।

मनोज के चचेरे भाई ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से मौत का आरोप लगाते हुए परिवार को 15 लाख रुपए का मुआवजा, उसकी पत्नी को सरकारी नौकरी , मुख्यमंत्री कोष से तत्काल सहायता राशि दिलाने, पिता रामचंद्र ने परिवार को बीपीएल में शामिल करने, बहू के लिए विधवा पेंशन व पालनहार योजना से जोडऩे की मांग के साथ लापरवाह चिकित्सक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर दी। बाकी लोग भी यही बातें दोहराने लगे। लोगों ने लंबे समय से लगे अधिकारी और स्टाफ को हटाने की मांग भी की। बुलाने के बावजूद नहीं आने पर नगरपालिका अध्यक्ष के खिलाफ भी नारे लगे। हालात देख तहसीलदार पाटीदार ने प्रभावित परिवार को योजनाओं से जोडकऱ नियम अनुसार लाभ दिलाने का भरोसा दिलाया। साथ ही घटनाक्रम बताने के बाद जिला कलक्टर की ओर से विभागीय कार्रवाई का आश्वासन देकर सबको शांत किया।

समझाइश के बाद लकडिय़ां श्मसान घाट पहुंचाई गई। उधर, कलक्टर बिष्णुचरण मल्लिक के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ. टांक ने तीन अधिकारियो का बोर्ड गठित कर जांच बैठाई है। तीन दिन में जांच रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई होगी।

रेफर करना मजबूरी थी
मनोज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे उदयपुर के लिए रेफर किया था। कुछ दिन पहले भी मैंने उसका उपचार किया था। उदयपुर में भी इलाज चला, लेकिन बीती रात उसकी हालत गंभीर थी।
डॉ. जयलाल बडग़ुर्जर, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सामान्य चिकित्सालय, सलूंबर

जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामले की जांच होगी। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सी.आर. देवासी, एडीएम, उदयपुर

Published on:
05 Nov 2017 04:27 pm
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