उदयपुर

VIDEO : आखिर क्यों दहलीज से खत्म होती जा रही है गेरू की रंगत….

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Nov 06, 2018
mitthi ka angan
आखिर क्यों दहलीज से खत्म होती जा रही है गेरू की रंगत....

धीरेन्द्र जोशी/उदयपुर. पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत सोमवार से हुई। इस मौके पर घरों की दहलीज को भी सजाने की परंपरा रही है लेकिन वक्त के साथ परंपरा का स्वरूप बदल गया है। एक दशक पूर्व तक हर आंगन और दहलीज पर गेरू (लाल रंग की विशेष मिट्टी) और चूने से विशेष सजावट की जाती थी, मगर अब इनकी जगह रंगों ने ले ली है। एेसे में घेरू से आंगन एवं दहलीज सजाने की परंपरा लुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है।
दीपावली पर्व पर पूर्व में मेवाड़ में घर-घर पर घेरू के मांडणे एवं धनदेवी लक्ष्मी पंगलिये बनाए जाते थे, अब यह नजारा कहीं-कहीं देखने को मिलता है। अधिकतर घरों में डिब्बाबंद रेडिमेड रंगों से ही सजावट की जा रही है। हालांकि रंग आज भी घेरूआ ही है।

एेसे होती थी सजावट
घेरू को पत्थर या मूसल से पीसकर महीन किया जाता था। इसके बाद पानी में गलाया जाता था। इस घोल में कपड़े को भीगो कर घरों के दहलीज को लाल रंग में पोता जाता था। धनतेरस के दिन सुबह-सुबह अधिकतर घरों के बाहर घेरू से सजावट कर देवी लक्ष्मी के स्वागत में दीप सजाए जाते थे।

चूने से बनाई जाती थी डिजाइन
घेरू रंगने के बाद दहलीज पर चूने के घोल से विभिन्न मांगलिक मांडणे बनाए जाते थे। मांडणे के लिए रूई या कपड़े से ब्रश बनाया जाता था। चूने के घोल से आंगन के चारों ओर बेल-बूटा, दीपक, स्वस्तिक, पगलिये, फूल-पत्तियां आदि बनाए जाते रहे हैं।

गांवों में जीवित है यह परंपरा
धन तेरस के दिन घेरू से घरों के आंगन को सजाने की परंपरा आज भी जीवित है। इसके तहत सुबह-सुबह महिलाएं एकत्रित होकर पीली मिट्टी की खदान पर जाती है। वहां से जरूरत के अनुसार मिट्टी लेकर मंदिर में दर्शन कर घर पहुंचती है। आंगन की लीपने के बाद घेरू से दहलीज और आंगन को रंगकर मांडणे बनाए जाते हैं।

अब नहीं आते घेरू बेचने वाले
कुछ वर्ष पूर्व तक दीपावली से पूर्व घेरू बेचने के लिए महिलाएं और पुरुष फेरी लगाते हुए घर-घर घूमते थे। अब डिब्बाबंद रंगों को अधिक महत्व देने के चलते इन्होंने भी शहर में फेरी लगाना बंद कर दिया है।

अब एक दिन पूर्व ही सजती है दहलीज

बाजार में विभिन्न कंपनियों के रंग मौजूद है जिनको सूखने में समय लगता है। एेसे में लोग एक से दो दिन पूर्व ही घरों की दहलीज को रंग देते हैं। धनतेरस पर सफेद पेंट से मांडणे बनाए जाते हैं। कई घरों तो रेडिमेड मांडणों से आंगन सजने लगा है।

Updated on:
06 Nov 2018 05:00 pm
Published on:
06 Nov 2018 04:03 pm