उदयपुर में हाइकोर्ट बेंच की स्थापना का मुद्दा, सरकार के रवैये से अधिवक्ताओं में रोष
मो. इलियास/ उदयपुर . उदयपुर में हाइकोर्ट बेंच की स्थापना के मुद्दे पर उच्च स्तरीय कमेटी के गठन के इंतजार में बैठे अधिवक्ताओं को सरकार ने एक माह के बाद एक लाइन की चिट्ठी भेजकर ठंडे छींटे दिए हैं। पत्र में संयुक्त शासन सचिव मधुसूदन शर्मा ने लिखा कि समिति का गठन प्रक्रियाधीन है। इसके बाद प्रभावित पक्षों को सुना जाएगा। पत्र को देख अधिवक्ताओं में रोष फैल गया। उन्होंने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रभावित तो उदयपुर संभाग की जनता है। सरकार अब किन प्रभावितों को सुनने की बात कर रही है। जोधपुर तो न्याय को विक्रेन्द्रीकरण होने पर विरोध कर रहा है जबकि उदयपुर गरीब आदिवासियों के हक की मांग कर रहा है।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि सप्ताहभर में अगर सरकार ने कमेटी का गठन करने का निर्णय नहीं किया तो फिर से आंदोलन करेंगे। हाइकोर्ट बेंच संघर्ष समिति के संरक्षक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत के अनुसार मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया था कि अब आपको आमरण अनशन की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन अब विधि मंत्री के बयान व इस तरह के पत्र पर उन्हें पुनर्विचार करना पड़ रहा है। शीघ्र ही समिति की बैठक बुलाकर आगामी निर्णय किया जाएगा।
गौरतलब है कि हाइकोर्ट बेंच की मांग को लेकर 36 वर्षों से उदयपुर के अधिवक्ता आंदोलनरत हैं और हर 7 तारीख को न्याय कार्य का बहिष्कार करते आ रहे हैं। पिछले 65 दिनों से अधिवक्ताओं का क्रमिक अनशन व धरना-प्रदर्शन चल रहा है। धरने को सभी संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। गत दिनों पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत ने तो आमरण अनशन किया था। मुख्यमंत्री के कहने पर नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने उनका अनशन तुड़वाया था।
सात दिन में फैसला नहीं तो आंदोलन उग्र
मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया था कि एक-दो दिन में कमेटी का गठन हो जाएगा, अब तक तो नहीं हुआ है। अभी चिट्ठी आई है कि प्रभावित पक्ष को सुना जाएगा। प्रभावित तो हम ही है, दूसरों का तो कोई लेना-देना ही नहीं है। सरकार को जो कुछ फैसला करना है वह सात दिन में करे अन्यथा उग्र आंदोलन करना पड़ेगा।
शांतिलाल चपलोत, हाइकोर्ट संघर्ष समिति संरक्षक व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
वे व्यावसायिक, हम जन हित के पोषक
जोधपुर के अधिवक्ता केवल व्यावसायिक हित और हम जन हित में संघर्षरत हैं। विधि मंत्री अब अगर मुख्यमंत्री के खिलाफ बोल रहे हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए, या फिर मुख्यमंत्री का दोगलापन है। बैठक में विधि मंत्री खुद मौजूद थे, वे उस वक्त कुछ नहीं बोले और अब बयान दे रहे हैं।
रमेश नंदवाना, मेवाड़-वागड़ संघर्ष समिति अध्यक्ष