देवराज हत्याकांड को एक साल पूरा हो चुका है। लेकिन, सरकार का वादा अभी पूरा नहीं हुआ।
उदयपुर. कन्हैया हत्याकांड के बाद उदयपुर को हिला देने वाली दूसरी घटना थी देवराज हत्याकांड। ठीक एक साल पहले हुई घटना के बाद शहर में आगजनी, पथराव जैसी घटनाओं से मानो तांडव ही मच गया था। तनावपूर्ण माहौल के बाद पूरा शहर खौफ में आ गया था। चारों ओर बने हालात का मंजर आज भी आंखों के सामने घूम आता है। पिछले साल 16 अगस्त के दिन के वाकये के बाद चार दिन हालात तनावपूर्ण रहे थे।
देवराज हत्याकांड को एक साल पूरा हो चुका है। लेकिन, सरकार का वादा अभी पूरा नहीं हुआ। देवराज के पिता पप्पू मोची ने बताया कि सरकार से 51 लाख रुपए सहायता राशि मिलने की घोषणा की गई थी। एक साल के दरमियान 31 लाख रुपए राशि मिली। अंतिम बार डेढ़ माह पहले 4 लाख रुपए राशि मिली थी, जबकि 20 लाख रुपए का अब भी इंतजार है। बड़ी बात ये कि घटनाक्रम को एक साल होने के बाद तक भी सरकारी सहायता पूरी नहीं मिल पाई है।
देवराज के पिता ने बताया कि घटना 16 अगस्त को हुई थी। चार दिन जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष के बाद 19 अगस्त को देवराज ने दम तोड़ दिया था। दर्ज केस में कुछ दिनों बाद सुनवाई शुरू हुई, जो अब तक चल रही है। अब तक कुल चार पेशी हुई है। पिता के बयान दर्ज करने के लिए पेशी डेढ़ माह पहले थी, लेकिन वकीलों की हड़ताल के चलते तारीख आगे बढ़ गई। पिता का कहना है कि मामला अभी काफी लम्बा चलने की संभावना है।
सूरजपोल थाना क्षेत्र के भटियानी चौहटा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के बाहर 10वीं कक्षा के दो छात्रों के बीच झगड़े के बाद एक ने दूसरे पर चाकू से वार कर दिया था। घटना को लेकर शहर में माहौल तनावपूर्ण हो गया था। लोगों ने प्रदर्शन कर बाजार बंद करवा दिए थे। कई जगहों पर तोड़फोड़ और पथराव कर दिया गया।
दो जगहों पर वाहनों में आग लगा दी गई तो चार अन्य जगहों पर वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था। प्रशासन ने धारा-144 लागू करते हुए पूरे शहर को कब्जे में ले लिया था। शहरभर के बाजार बंद करवाकर सड़कों पर प्रदर्शन किया गया। भीड़ को काबू करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। बवाल की आशंका में प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं भी बंद की थी।
मैं पीड़ित परिवार के लगातार संपर्क में हूं। अब तक मिली सहायता को लेकर भी बात होती रही है। जितनी सहायता सरकार की ओर से दिलाई जानी है, उसमें अभी राशि आनी बाकी है। देवराज के पिता जूतों की कारीगरी का काम अच्छे से जानते हैं। ऐसे में उन्हें संविदा पर नौकरी के बजाय जिला प्रशासन के माध्यम से सहेलियों की बाड़ी क्षेत्र में केबिन आवंटित करवाई गई है।
शिल्पा पामेचा, निवर्तमान पार्षद