
जयपुर, अजमेर, उदयपुर से 2017 में सामने आए अवैध आम्र्स लाइसेंस के चर्चित केस में नया मोड़ आया है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में जम्मू कश्मीर के तत्कालीन आईएएस राजीव रंजन सहित 21 आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जम्मू के विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दर्ज की है। कोर्ट ने 12 फरवरी को अभियोजन शिकायत का संज्ञान भी लिया है।
प्रवर्तन निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार ईडी ने राजस्थान एटीएस और सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। वर्ष 2017 में राजस्थान एटीएस ने जब मामले का खुलासा किया था, तब उदयपुर से भी कुछ चर्चित नेता, व्यापारी सहित अन्य की गिरफ्तारी हुई थी, जिन्होंने गिरोह से संपर्क करके अपने नाम पर अवैध आम्र्स लाइसेंस बनवाए थे। सामने आया था कि 2013 से 2016 के बीच गिरोह के जरिए राजस्थान और मध्यप्रदेश के हजारों लोगों ने अवैध आम्र्स लाइसेंस बनवाए थे। आरोपियों की 4.69 करोड़ तक की चल-अचल संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। तलाशी और जब्ती कार्रवाई के दौरान भी ईडी ने आरोपियों से 1.58 करोड़ नकद और सोना बरामद किया था।
ईडी ने इन्हें बनाया आरोपी
ईडी ने जम्मू-कश्मीर कुपवाड़ा के तत्कालीन डीएम, एडीएम आईएएस राजीव रंजन, एसडीएम ऑफिस के न्यायिक क्लर्क इतरत हुसैन रफीकी, अन्य अधिकारियों, गन हाउस डीलर-एजेंट राहुल ग्रोवर, सैयद अदेल हुसैन शाह और सैयह अकील शाह सहित अजमेर के गन हाउस डीलर-एजेंट्स सहित 21 लोगों को आरोपी बनाया है।
यह था पूरा मामला
सितंबर 2017 में राजस्थान पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए अवैध आम्र्स लाइसेंस गिरोह का भाण्डाफोड़ किया था। तब राजस्थान पुलिस ने दावा किया था कि यह देश का सबसे बड़ा अवैध आम्र्स लाइसेंस गिरोह का खुलासा था। तब एटीएस टीम ने गिरोह के मास्टर माइंड अजमेर से पकड़े गए जुबैर सहित जम्मू कश्मीर के राहुल और पंजाब के विशाल के कब्जे से 100 से अधिक अवैध आम्र्स लाइसेंस जब्त किए थे। आरोपियों का गिरोह जम्मू-कश्मीर का पता दिखाकर वहां के डीएम-एडीएम सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारियों से मिलीभगत कर अयोग्य लोगों को अवैध आम्र्स लाइसेंस जारी करते थे। एक लाइसेंस के बदले 3 से 5 लाख रुपए तक वसूले गए थे। जबकि ये लोग जम्मू-कश्मीर के बजाए राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के रहने वाले थे। राजस्थान एटीएस के अलावा सीबीआई ने भी 2021 में इस मामले की जांच की थी। ईडी ने जांच में पाया कि जम्मू के कुपवाड़ा के अधिकारियों और गन हाउस डीलर-एजेंट, बचौलियों ने मिलीभगत कर आम्र्स एक्ट के मानदंड और प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए आर्थिक लाभ के बदले अयोग्य लोगों को बड़ी संख्या में अवैध आम्र्स लाइसेंस जारी किए थे। मामले में बड़ी मात्रा में मनी लॉड्रिंग हुई थी।