Rajasthan Education Department : कमाल है। शिक्षा विभाग में एक रोचक घटना देखने को मिल रही है। जयपुर, अलवर, सीकर समेत कई जिलों के शिक्षकों ने प्रमोशन फोरगो किया। यानि की इन्हें प्रमोशन की चाह नहीं है। वजह जानकार हैरान रह जाएंगे।
Rajasthan Education Department : नौकरी चाहे सरकारी हो या प्राइवेट, हर अधिकारी और कर्मचारी की ख्वाहिश होती है कि वह ऊंचे से ऊंचे ओहदे तक पहुंचे। लेकिन शिक्षा विभाग इससे इतर है। यहां बड़ी तादाद में ऐसे शिक्षक भी है जो घर छूटने के डर से पदोन्नति नहीं चाहते। हाल ही में प्रदेश के 159 प्रधानाचार्य और उप आचार्य पद पर कार्यरत शिक्षकों ने पदोन्नति लेने से परित्याग (फोरगो) किया है। निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर ने ऐसे शिक्षकों की सूची जारी की है। शिक्षा विभाग में हाल ही में विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू हुई है, जिसमें प्राचार्य और इसके समकक्ष पदों पर पदोन्नत किया जा रहा है।
रोचक तथ्य यह है कि पदोन्नति का परित्याग करने वालों में समृद्ध जिलों के शिक्षक सर्वाधिक हैं। प्रदेश की राजधानी जयपुर और इसके आसपास के जिलों के शिक्षक सर्वाधिक है। शेखावाटी अंचल के चुरू, झुंझुनूं तथा जयपुर के आस-पास के अलवर, भरतपुर, दौसा, करौली और नागौर के शिक्षकों ने विभागीय पदोन्नति लेने से मना किया है। शिक्षकों ने निर्धारित तिथि तक पदोन्नत पदों पर न कार्यभार ग्रहण किया और न शाला दर्पण पोर्टल पर अपडेट किया। कई शिक्षकों ने लिखित में परित्याग की सूचना दी। इसे शिक्षा विभाग ने स्वीकृत मान लिया।
जयपुर 43
अलवर 18
सीकर 11
नागौर 11
झुंझुनूं 09
चूरू 08
जोधपुर 06
उदयपुर 04
(जिला और परित्याग करने वाले शिक्षकों की संख्या)
1- पदोन्नति के बाद जगह बदलनी पड़ेगी।
2- लंबे समय से एक जगह नियुक्त होने के कारण स्थायी निवास छूटेगा।
3- वित्तीय लाभ भी ज्यादा नहीं होगा।
4- पारिवारिक और व्यक्तिगत जिमेदारियों के कारण दूसरे स्थान पर जाना नहीं चाहते।
5- प्रशासनिक दायित्व से मुक्ति चाहते हैं।