
मो. इलियास/उदयपुर. शहर में आरसीए फार्म के पीछे से निकल रही सुनसान रोड पर बुधवार रात आबकारी अधिकारी की हत्या लूट की नीयत से ही की गई थी। वारदात में आरोपियों ने मृतक व उनकी बेटी से लूट में 6 हजार रुपए मिले थे, जिसे सभी ने एक-एक हजार रुपए आपस में बांट लिए। इस राशि से किसी ने उधारी चुकाई तो अपचारी ने तो ड्रेस खरीद लाया। पुलिस ने 48 घंटे में ही वारदात का खुलासा करते हुए एक अपचारी सहित पांच आरोपियों को पकड़ा। फिलहाल एक आरोपी फरार है। घटना स्थल पर चार आरोपी मौजूद थे, जबकि दो अन्य इसी गैंग के सदस्य होकर अन्य लूटपाट की योजनाओं में शामिल रहे थे।
पुलिस अधीक्षक राजेन्द्रप्रसाद गोयल ने बताया कि आबकारी विभाग के कार्यालय अधीक्षक सेक्टर-3 शांतिनगर निवासी यशवंत (56) प्रतापनारायण शर्मा की हत्या व लूटपाट के आरोप में मल्लातलाई निवासी जगदीश उर्फ दरबार (27) पुत्र गिरधारी ओड़, कानोड़ हाल बलीचा निवासी रमेश उर्फ रामा (19) पुत्र खेमराज मीणा, गणेश (27) पुत्र रोडजी मीणा व डंूगला (चित्तौडगढ़़) हाल बलीचा निवासी राजमल उर्फ राजू (24) पुत्र दलीचंद लोहार को गिरफ्तार किया जबकि एक अपचारी को डिटेन किया। मामले में एक आरोपी मल्लातलाई निवासी दीपक (25) पुत्र भंवरलाल ओड फरार है।
गौरतलब कि आरोपियों ने बुधवार रात को शर्मा (56) की उनकी पुत्री नेहा व पांच वर्षीय दोहिते विहान के सामने वैन में चाकूओं से गोदकर हत्या कर दी थी। ये तीनों अहमदाबाद में इलाज करवा कर देर रात बस से उदयपुर लौटे थे। आरोपियों ने उन्हें सेक्टर-3 छोडऩे के बहाने अपनी कार में बिठा लिया था।
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विरोध करने पर मारे थे चाकू
वैन में दीपक, जगदीश रमेश व बाल अपचारी शामिल थे। उदियापोल से शर्मा व उनके परिवार को बिठाने के बाद वे जैसे ही फिशरीज कॉलेज की तरफ मुड़े तभी शर्मा ने विरोध किया था। आरोपियों को कहना था कि धमकाने पर भी वह नहीं माना। पर्स छीनने का प्रयास किया तो विरोध करने लगे। इस पर दीपक ने गाड़ी ने रोक दी और जगदीश ने शर्मा की जांघ पर चाकू से वार कर दिए। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मृत्यु हो गई। आरोपियों ने वारदात के बाद शर्मा सडक़ पर पटकने के साथ ही कुछ ही दूरी पर उनकी पुत्री नेहा व विहान को छोड़ दिया था।
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बांट लिए आपस में पैसे
आरोपियों को शर्मा व उनकी बेटी के पर्स के पर्स में 6 हजार रुपए नकद मिले। इन चारों एवं दो अन्य साथियों ने एक-एक हजार रुपए बांट लिए। दीपक ने तो रामा से आठ सौ रुपए उधार के काटकर उसे दो सौ रुपए ही दिए जबकि अपचारी को लूट के पैसों से ड्रेस तक खरीद लाया।