
उदयपुर. आपराधिक मामले दर्ज कराने की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर झूठे प्रकरण दर्ज कराने वालों पर पुलिस अब शिकंजा कसने की तैयारी में है। पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के बाद एसपी ने जिले के सभी थानाधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच में झूठे पाए जाने वाले मामलों में केवल एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाने तक सीमित नहीं रहें, बल्कि शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए।
पुलिस मुख्यालय की अपराध समीक्षा के बाद जारी आदेश में कहा गया कि जिन प्रकरणों की जांच में शिकायतें झूठी पाई जाती हैं, उनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 182 से 211 और बीएनएसएस की धारा 217 से 248 के तहत इस्तगासा तैयार किया जाए। कोर्ट की ओर से एफआइआर को झूठा मानते हुए स्वीकार किए जाने के बाद संबंधित शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। ऐसे में अब जांच अधिकारियों को झूठे मामलों की पहचान होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया अपनानी होगी। इसका उद्देश्य न केवल फर्जी मामलों पर अंकुश लगाना है, बल्कि न्याय व्यवस्था में अनावश्यक दबाव को भी कम करना है। आदेश में सभी थानाधिकारियों को ऐसे मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करने और कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है।
इस कारण निकाले आदेश
- व्यक्तिगत रंजिश, संपत्ति विवाद, पारिवारिक मतभेद और दबाव बनाने के उद्देश्य से झूठे मुकदमे दर्ज कराने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
- ऐसे मामलों के कारण पुलिस का समय और संसाधन का दुरुपयोग होता है, जबकि वास्तविक पीड़ितों के मामलों की जांच भी प्रभावित होती है।
- अधिकारियों ने माना कि इसी वजह से पुलिस मुख्यालय ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
- यह कदम उनके लिए भी चेतावनी होगी, जो किसी को परेशान करने या दबाव बनाने के लिए कानून का दुरुपयोग करते हैं।
- वास्तविक पीड़ितों के मामलों की जांच को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने में भी मदद मिलेगी और उन्हें न्याय मिल पाएगा।
हिस्ट्रीशीटर्स को लेकर अफसरों की जवाबदेही
एसपी ने सभी थानाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हिस्ट्रीशीटर और हार्डकोर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए। यदि किसी हिस्ट्रीशीटर की ओर से दोबारा अपराध किया जाता है और उसके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
चलेगा सिंथेटिक ड्रग्स विरोधी अभियान
जिले में सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया गया है। सात दिन तक चलने वाले इस अभियान में मादक पदार्थों की तस्करी, बिक्री और उपयोग से जुड़े मामलों पर विशेष फोकस रहेगा। पुलिस अधिकारियों को अधिकतम कार्रवाई कर अभियान के ठोस परिणाम देने के निर्देश दिए हैं।
करना होगा लंबित मामलों का निस्तारण
हेल्पलाइन 1930 और संपर्क पोर्टल पर लंबित केस के निस्तारण को लेकर भी पुलिस मुख्यालय ने सख्ती दिखाई है। विशेष अभियान चलाकर अधिकतम शिकायतों का निपटारा करने और पोर्टल पर डेटा अपडेट रखने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।