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Rajasthan Monsoon: राजस्थान में इस बार मानसून के पहले चरण में नहीं होगी भारी बारिश! जानिए कब हो रही प्रदेश में एंट्री

Monsoon Arrival Rajasthan: आमतौर पर हर वर्ष 18 से 22 जून के बीच अरब सागर की शाखा सबसे पहले मेवाड़-वागड़ क्षेत्र से राजस्थान में प्रवेश करती, लेकिन इस बार अब तक प्रदेश में आधिकारिक प्रवेश नहीं हो पाया है। जानिए मानसून कब तक राजस्थान में दस्तक दे सकता है।
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उदयपुर

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Santosh Trivedi

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Updated: 23 Jun 2026, 5:54 PM IST

heavy rain in Rajasthan

फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan Monsoon 2026: उदयपुर। दक्षिण-पश्चिम मानसून के मेवाड़-वागड़ के रास्ते राजस्थान में प्रवेश का इंतजार अब अंतिम चरण में है। 21 जून से बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की मानसूनी शाखाएं आगे बढ़ी हैं। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश शुरू हो गई है। इसके प्रभाव से दक्षिणी राजस्थान, खासकर मेवाड़-वागड़ क्षेत्र में भी इस सप्ताह मानसूनी गतिविधियां तेज होने की संभावना है। हालांकि शुरुआती दौर में मानसून कमजोर रह सकता है और बहुत अधिक बारिश की उम्मीद नहीं है।

आमतौर पर हर वर्ष 18 से 22 जून के बीच अरब सागर की शाखा सबसे पहले मेवाड़-वागड़ क्षेत्र से राजस्थान में प्रवेश करती रही है, लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार धीमी रहने से अब तक प्रदेश में आधिकारिक प्रवेश नहीं हो पाया है। इसके बावजूद पिछले दिनों उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और हाड़ौती क्षेत्र में हुई प्री-मानसून बारिश ने मौसम को राहतभरा बनाया था।

सभी की नजर आसमान पर

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अगर परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो मानसून राजस्थान में 28 जून के बाद ही प्रवेश करेगा। मानसून की देरी से किसानों की निगाहें मौसम पर है। खरीफ फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त बारिश का इंतजार हो रहा है। वहीं, शहरवासी भी तेज गर्मी और उमस से राहत दिलाने वाली बारिश की राह देख रहे हैं। यदि मौसम विभाग का अनुमान सही रहा तो इसी सप्ताह मानसून की दस्तक हो सकती है।

इस वर्ष मानसून कमजोर रहने के कारण

  • अलनीनो का प्रशांत महासागर में उभरना और भारतीय मानसून पर विपरीत प्रभाव।
  • लगातार पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय रहना भी मानसून में देरी होने की वजह है।
  • पामीर-पढ़ार, हिंदुकुश पर्वत पर लगातार बर्फबारी होना, जिससे निम्न वायुदाब नहीं बन रहा।
  • भारतीय उपमहाद्वीप में हवा ऊपर नहीं उठ रही, जिससे मानसूनी बादल कम बरस रहे।
  • पूर्वी जेट स्ट्रीम का विषवत रेखा के दक्षिण में खिसकना, जिससे प्रशान्त महासागर के पूर्वी भाग से आने वाली हवा बंगाल की खाड़ी में प्रवेशकर भारत की ओर आने की बजाय दक्षिण में बह रही, जिससे अरब सागर व बंगाल की खाड़ी में नमी वाली हवा की कमी है।

मानसून के पहले चरण में भारी वर्षा के संकेत नहीं हैं। शुरुआती दौर में रुक-रुक कर बारिश, गरज-चमक और तेज हवा की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इसके बाद जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून के अधिक सक्रिय होने के आसार हैं।

  • प्रो. नरपतसिंह राठौड़, मौसमविद