
उदयपुर . सीमित आय के चलते उन्नत एवं महंगे कृषि उपकरणों को खरीदने में असमर्थ किसानों को अब कृषि उपकरणों के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाने होंगे। सरकार आगामी तीन वर्षों में कृषि उपकरणों की कमी वाले 2,652 गांवों में फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने जा रही है। इस साल प्रदेश में 750 केन्द्रों की स्थापना किए जाएंगे। इन्हें कस्टम हायरिंग सेन्टर का नाम दिया जाएगा।
किराए पर मिलेंगे कृषि उपकरण कृषि उपनिदेशक विस्तार केएन सिंह के अनुसार योजना के तहत सभी केन्द्रों पर उन्नत कृषि उपकरण किराए पर मिलेंगे। इसके लिए पहले आवेदन करने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी। उपकरणों के लिए बाजार दर के हिसाब से प्रति घंटा किराया वसूला जाएगा। सेंटर चलाने वाले व्यक्ति को मशीनों को संरक्षित रखना होगा। छह साल तक उपकरण किसानों को किराए पर देने अनिवार्य होंगे। सेन्टर का पर्यवेक्षण जिला स्तरीय कृषि अधिकारी करेंगे।
यह होगा कस्टम हायरिंग सेन्टर पर
सेन्टर पर विभिन्न प्रकार के उन्नत व महंगे भूमि सुधार, जुताई एवं सीड बैड प्रिपेरेशन, बुवाई, रोपण, कटाई एवं खुदाई, इंटर कल्टीवेशन उपकरण, पौध संरक्षण, एनीमल डिटरेंट बायो अकस्टिक्स उपकरण, कटाई व गहाई के साथ ही अवशिष्ट प्रबंधन के लिए उपयोगी उपकरण उपलब्ध रहेंगे। सेन्टर के संधारण के लिए केन्द्र के उद्यमियों को कृषि विज्ञान केन्द्रों, अनुमोदित परीक्षण केन्द्रों, एफएमटीटीआई व आईसीएआर से तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सेन्टर स्थापना के लिए यह रहेगी प्राथमिकता
- एेसे जिले जहां फार्म पावर की उपलब्धता कम हो।
- लघु एवं सीमान्त जोतों के तहत बड़ा क्षेत्र हो।
- प्रतिदिन कम से कम दस हैक्टेयर या प्रति सीजन तीन सौ हैक्टेयर में सेवाएं दे सकें।
- सेन्टर कलस्टर, विशिष्ट फसल व लागत आधारित उपागम पर स्थापित होंगे।
- जहां टै्रक्टरों की उपलब्धता कम हो।
- एेसे स्थान जहां उत्पादकता कम हो, लेकिन उत्पादन बढ़ाने की पर्याप्त संभावना हो।
ऋण पर मिलेगा चालीस प्रतिशत अनुदान
सेंटर स्थापना के लिए सरकार की ओर से उपकरण लागत का चालीस प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए ग्रामीण उद्यमी, प्रगतिशील किसान व स्वयं सहायता समूह आवेदन कर सकेंगे। पच्चीस लाख से अधिक लागत के केन्द्रों की स्थापना क्रेडिट लिंक बैंक से होगी। कृषि उपनिदेशक को आवेदन करना होगा।
उच्च प्रौद्योगिकी, उच्च उत्पादन केन्द्र भी बनेंगे
उच्च उत्पादन के लिए उत्कृष्ट कृषि उपकरणों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए उच्च प्रौद्योगिकी, उच्च उत्पादन केन्द्र बनाए जाएंगे। यह केन्द्र एेसे स्थानों पर बनाए जाएंगे, जहां नकद व उच्च परिणामों वाली फसलों को बोया जाता है। प्रति सीजन कम से कम पांच सौ हैक्टेयर में सेवाएं देने में सक्षम हो।
यह कृषि खण्ड हुए चयनित
योजना के तहत प्रदेश के कोटा, भीलवाड़ा, भरतपुर, जालौर, गंगानगर, उदयपुर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर व सीकर जिले का चयन किया गया। इनका चयन सरकार का फर्म के साथ हुए एमओयू के आधार पर किया गया है। इसके साथ ही प्रदेशभर में कस्टमर हायरिंग सेवाएं देने के लिए मोबाइल एप बनाया जाएगा। जिसमें स्थापित केन्द्रों व अन्य फर्म भी पंजीयन कर सकेंगे।
समूह सदस्यों के लिए 80 प्रतिशत अनुदान
योजना के तहत कृषकों के स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियां व कृषक उत्पादन संगठनों को अधिकतम दस लाख रुपए ऋण व लागत का अस्सी प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इसके तहत स्थापित केन्द्रों का उपयोग समूह सदस्य ही कर सकेंगे। समूह सदस्यों के एक ही परिवार से होने पर लाभ नहीं मिलेगा। समूह में न्यूनतम पांच व अधिकतम दस सदस्य अनिवार्य होने चाहिए।