उदयपुर

Udaipur: ट्रक ड्राइवर पिता ने कर्ज लेकर भेजा था कनाडा, बेटे ने रचा इतिहास; कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता गोल्ड

उदयपुर में पढ़े महेश कुमार बेनीवाल ने कनाडा में पावरलिफ्टिंग जूनियर 120kg वर्ग में गोल्ड जीता। ट्रक ड्राइवर पिता ने 4 लाख रुपए का लोन लेकर महेश को भेजा था। कुल 6 लाख जुटाकर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और तिरंगा लहराया।
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Oct 01, 2026
mahesh kumar beniwal
गोल्ड मेडल के साथ महेश कुमार बेनीवाल (पत्रिका फोटो)

Mahesh Kumar Beniwal Powerlifting Gold: उदयपुर: जोधपुर के पड़ियाल गांव से निकले महेश कुमार बेनीवाल ने सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। कनाडा में आयोजित कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता के पावरलिफ्टिंग जूनियर 120 किलो वर्ग में महेश ने गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। उनकी इस सफलता के पीछे परिवार का बड़ा संघर्ष भी जुड़ा है। बेटे को प्रतियोगिता में भेजने के लिए परिवार को करीब छह लाख रुपए जुटाने पड़े। महेश के पिता ट्रक ड्राइवर हैं और उन्होंने बेटे को कनाडा भेजने के लिए ट्रक पर करीब चार लाख रुपए का लोन लिया। बाकी रकम परिवार की बचत से जुटाई गई।

प्रतियोगिता में महेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्क्वेट में 280 किलो, बेंच प्रेस में 172 किलो और डेडलिफ्ट में 300 किलो वजन उठाया। खास तौर पर 300 किलो की डेडलिफ्ट ने उन्हें मुकाबले में मजबूत स्थिति में पहुंचाया। छह खिलाड़ियों के बीच हुए मुकाबले में महेश ने शीर्ष स्थान हासिल करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। राजस्थान से इस वर्ग में वे अकेले खिलाड़ी थे।

पढ़ाई के साथ जारी रखा खेल

महेश वर्तमान में विद्या भवन रूरल इंस्टीट्यूट में एमए के छात्र हैं। उन्होंने पिछले वर्ष संस्थान में प्रवेश लिया था। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने खेल और पढ़ाई दोनों को साथ जारी रखा। संस्थान की प्रबंधक सीओ राजेन्द्र भट्ट, कनिका शर्मा और शारीरिक शिक्षक नीरू श्रीमाली के प्रोत्साहन को महेश अपनी यात्रा में महत्वपूर्ण मानते हैं। संस्थान की ओर से मिले हौसले ने उन्हें लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।

नेशनल प्रतियोगिता से खुला अंतरराष्ट्रीय रास्ता

महेश के अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंचने का रास्ता जुलाई में हैदराबाद में हुई नेशनल प्रतियोगिता से खुला। जूनियर 120 किलो वर्ग में आठ खिलाड़ियों के बीच मुकाबला हुआ। इसमें महेश ने बेहतर प्रदर्शन किया, जिसके आधार पर उनका चयन कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता के लिए हुआ।

महेश के मुख्य कोच गुरुविंदर सिंह हैं, जो अंबाला में रेलवे के कोच हैं। महेश फरवरी में उनके संपर्क में आए। उन्होंने दिल्ली में कोच की देखरेख में ट्रेनिंग ली। इसके बाद जोधपुर लौटने पर भी ऑनलाइन मार्गदर्शन के जरिए अभ्यास जारी रखा।

महेश की इस उपलब्धि ने यह साबित किया कि सीमित संसाधन प्रतिभा के रास्ते में हमेशा बाधा नहीं बनते। परिवार के आर्थिक संघर्ष, पिता के कर्ज और लगातार मेहनत के बीच उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई है।

Updated on:
01 Oct 2026 10:04 am
Published on:
01 Oct 2026 10:04 am