उदयपुर

वन विभाग की सैद्धांतिक स्वीकृति, देवास की दो सुरंगों की खुदाई की तैयारी, मुहाना तैयार

वन विभाग की देरी से दो वर्ष देरी से चल रही परियोजना, अब 2029 तक पूरी होने का लक्ष्य, लिखित सहमति का पत्र आने के साथ शुरू हो जाएगी सुरंगों की खुदाई और बांधों का निर्माण उदयपुर. झीलों को सदानीरा रखने वाली देवास परियोजना के तृतीय और चतुर्थ चरण का काम वन विभाग की सैद्धांतिक स्वीकृति […]

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Mar 13, 2026
source patrika photo

वन विभाग की देरी से दो वर्ष देरी से चल रही परियोजना, अब 2029 तक पूरी होने का लक्ष्य, लिखित सहमति का पत्र आने के साथ शुरू हो जाएगी सुरंगों की खुदाई और बांधों का निर्माण

उदयपुर. झीलों को सदानीरा रखने वाली देवास परियोजना के तृतीय और चतुर्थ चरण का काम वन विभाग की सैद्धांतिक स्वीकृति के बाद अब दो साल की देरी शुरू हो रहा है। देवास परियोजना की सुरंग निर्माण के लिए पहाड़ों को मशीनों से काटकर एक सुरंग का मुहाना (एडिट) तैयार कर लिया गया है, दूसरी सुरंग के एडिट बनाने का कार्य चल रहा है। जल संसाधन विभाग के सूत्रों के अनुसार वन विभाग की लिखित स्वीकृति मिलते ही बांध और सुरंग बनाने का कार्य शुरू होगा। गौरतलब है कि एक मार्च 2024 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शिलान्यास किया था। इसके लिए बजट भी जारी हुआ, पर बांध और टनल के काम शुरू नहीं हो पाए।

देवास परियोजना के तृतीय एवं चतुर्थ चरण से उदयपुर शहरवासियों की दशकों तक प्यास बुझाई जा सकेगी। जन स्वास्थ्य अभियान्त्रिकी विभाग के अनुसार 2031 में शहर की जनसंख्या 875874 तक होने की संभावना है, जिसके लिए साल में 2397 एमसीएफटी पानी चाहिए। पर अभी 1738 एमसीएफटी पेयजल ही उपलब्ध है। यह मांग 2036 तक 2613 एमसीएफटी हो जाएगी। इसलिए पेयजल मांग की पूर्ति के लिए देवास तृतीय एवं चतुर्थ परियोजना तैयार की है।देवास तृतीय परियोजना के अन्तर्गत गोगुन्दा तहसील के नाथियाथाल गांव के पास 703 एमसीएफटी क्षमता का देवास तृतीय बांध बनेगा, इससे 11.04 लम्बी सुरंग का निर्माण कर देवास द्वितीय (आकोदडा बांध) में जल अपवर्तन किया जाएगा। पूर्व निर्मित आकोदडा बांध एवं सुरंग से पिछोला झील में जल अपवर्तन होगा। देवास चतुर्थ परियोजना के अन्तर्गत गोगुन्दा तहसील के अम्बावा गांव के निकट 390 एमसीएफटी क्षमता का देवास चतुर्थ बांध का निर्माण कर इससे 4.3 किमी सुरंग का निर्माण कर देवास तृतीय बांध से जोड़ा जाएगा। देवास तृतीय एवं चतुर्थ के लिए 156.18 हैक्टेयर वन भूमि तथा 133.45हैक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहित की है। देवास तृतीय एवं चतुर्थ परियोजना की अनुमानित लागत 1690.55 करोड है। यह कार्य 44 माह में पूरा करने का लक्ष्य है। इससे उदयपुर शहर की झीलों को प्रतिवर्ष 1000 एमसीएफटी अतिरिक्त पानी मिलेगा।

हैदराबाद की कंपनी को बनानी है सुरंग

बांध निर्माण का कार्य भोपाल की दिलीप बिल्डकॉन कर रही है। सुरंग निर्माण का कार्य हैदराबाद की फर्म मैसर्स मेघा इंजीनियरिंग लिमिटेड कर रही है।

यह काम हुआ देवास प्रथम व द्वितीय परियोजना में

वर्ष 1973-74 में देवास- प्रथम (गोराणा बांध) का निर्माण हुआ, जिसकी सकल क्षमता 120 एमसीएफटी है। 2011 में उदयपुर शहर की पेयजल मांग के अनुसार देवास द्वितीय परियोजना की परिकल्पना की गई। देवास द्वितीय परियोजना में मादडी बांध कुल क्षमता 85 एमसीएफटी का निर्माण किया। इससे निकलने वाली 1.21 किमी की सुरंग को आकोदडा की मुख्य सुरंग से जोडा। 302 एमसीएफटी क्षमता का आकोदडा बांध का निर्माण कर 11.05 किमी लम्बी सुरंग बनाकर पिछोला झील में जल अपवर्तन के लिए मिलाया।

Published on:
13 Mar 2026 06:27 pm
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