उदयपुर . अब कोई भी उच्च शिक्षा संस्थान अपनी ओर से संचालित ऑनलाइन कोर्सेज करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री या डिप्लोमा दे सकेंगे।
उदयपुर . अब कोई भी उच्च शिक्षा संस्थान अपनी ओर से संचालित ऑनलाइन कोर्सेज करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री या डिप्लोमा दे सकेंगे। उच्च शिक्षा में ये ऐतिहासिक सुधार किया गया है। पिछले दिनों विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसे स्वीकृति दे दी है।
ये उन विषयों में हो सकेगा जिसका पाठ्यक्रम मेनुअल पाठ्यक्रम के समान हो। स्नातक स्तर पर न्यूनतम एक बैच को अनुमोदित किया गया है। प्रायोगिक कार्यक्रमों में ऑनलाइन कोर्स को मंजूरी नहीं दी गई है। हर तीन माह में वीडियो व्याख्यान, ई- सामग्री, आत्म मूल्यांकन और ग्रुप डिस्कशन जरूरी होगा।
परीक्षा प्रोक्टर मोड और सामान्य परीक्षा के अनुरूप करनी होगी। जो शिक्षण संस्थान पांच वर्ष से एनआईआरएफ और नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रेडेशन काउंसिल (नॉक) से जुड़ा हुआ है, वह ऑनलाइन कोर्स चला सकेगा।
ये जरूरी होगा कि नेशनल नॉक का न्यूनतम स्कोर 3.26 और नेशनल इंस्टीटयूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में टॉप 100 में शामिल हो। हालांकि गत तीन में से दो वर्षों में यह स्कोर होना चाहिए, इसमें मौजूदा स्कोर मान्य होगा।
निर्णय अच्छा है, लेकिन यह जरूरी है कि शिक्षा का व्यावसायीकरण नहीं हो। शिक्षा किसी भी रूप में मिल सकती है। ये जरूरी नहीं कि इसके लिए हर व्यक्ति कक्षा में बैठे। आज के दौर में यह बड़ी चुनौती भी है। हालांकि इसके मापदण्ड इतने कड़े हंै कि इसमें गिने-चुने संस्थान ही शामिल होंगे।
डॉ.अनिल कोठारी, निदेशक, प्रबंध अध्ययन संकाय, सुखाडिय़ा विश्वविद्याल य, उ द य पु र