उदयपुर

ऐतिहासिक वेवर महादेव मंदिर : सावन के हर सोमवार उमड़ता है भोले के भक्तों का सैलाब

Aug 03, 2026
Rajasthan

Bसावन का सत्कार...
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Bछह सौ वर्ष पुराना शिवधाम, नौ धूणियों की तपोभूमि और विशाल अष्टधातु त्रिशूल बना आस्था का केंद्रB
Bआमेट. Bनगर के चंद्रभागा नदी तट पर विराजित भगवान वेवर महादेव का प्राचीन मंदिर श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र है। लगभग 600 वर्ष से अधिक पुराना यह शिवधाम साधु-संतों और सिद्ध योगियों की तपोभूमि के रूप में भी प्रसिद्ध रहा है। श्रावण मास में मंदिर की छटा देखते ही बनती है। सावन के प्रत्येक सोमवार यहां भोलेनाथ के भक्तों की विशेष भीड़ उमड़ती है। समाजसेवी एवं वेवर महादेव मंदिर मंडल समिति के अध्यक्ष भरत कुमार बागवान ने बताया कि मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा भीमसिंह ने लगभग 600 वर्ष से अधिक समय पूर्व भगवान वेवर महादेव के शिवलिंग की स्थापना करवाई थी। स्थापना के साथ साधु-संतों और सिद्ध योगियों द्वारा यहां नौ धूणियों की स्थापना भी की गई। प्राचीन काल में यह धार्मिक स्थल भीमाशंकर महादेव के नाम से भी जाना जाता था। महाराणा ने यहां माताजी और भैरुजी बावजी के मंदिरों की स्थापना भी करवाई। धूणियों के सामने हनुमानजी के मंदिर की स्थापना सिद्धयोगी महंत संतोष गिरीजी नागाजी ने करवाई। नागाजी ने भगवान महादेव के निज मंदिर का जीर्णोद्धार करवाते हुए माता पार्वती, कार्तिक स्वामी, गणेशजी और नंदी की प्रतिमाएं स्थापित करवाईं। उनके समय में यहां 52 कुंडी महायज्ञ का आयोजन भी हुआ, जिसमें देशभर के अनेक तपस्वी महात्माओं को आमंत्रित किया गया। उस दौरान पूरे एक माह तक नगर धार्मिक वातावरण में सराबोर रहा।
Bवेवर माता के चमत्कार के बाद पड़ा वेवर महादेव नामB
मान्यता है कि कालांतर में भेरूनाथ की गुफा में विराजित श्री वेवर माता के चमत्कार से प्रभावित होकर इस धर्मस्थल का नाम वेवर महादेव प्रचलित हुआ। समय के साथ नौ में से पांच यज्ञ धूणियां विलुप्त हो गईं, जबकि वर्तमान में चार धूणियां मंदिर परिसर में स्थापित हैं। मंदिर परिसर में अष्टधातु से निर्मित लगभग एक टन वजनी और 21 फीट ऊंचा महाशक्तिशाली त्रिशूल भी स्थापित है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यह त्रिशूल मनोकामनाएं पूर्ण करता है। इसकी ख्याति पूरे भारतवर्ष में है और सोशल मीडिया पर इसके साथ सेल्फी लेने वालों की भी होड़ रहती है।
Bभोलेनाथ की शोभायात्रा मेवाड़ में प्रसिद्धB
वर्तमान में टांक राजपूत परिवार के सदस्य भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और लक्ष्मण सिंह टांक मंदिर के पुजारी हैं। वेवर महादेव मंदिर समिति के सानिध्य में प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जो पूरे मेवाड़ में प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि के दूसरे दिन वेवर महादेव समिति और नगरपालिका के तत्वावधान में एक दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। वहीं, लगातार 10 वर्षों से नगरवासियों की ओर से श्रावण माह में कांवड़ यात्रा भी निकाली जा रही है।
Bआस्था का प्रमुख धाम वेवर महादेव मंदिरB
मंदिर परिसर में भैरुजी बावजी मंदिर से निकलने वाली गुफा करीब 10 किलोमीटर दूर अरावली की पहाड़ियों में सामने की पहाड़ी पर स्थित सिम माता मंदिर के पीछे निकलती है। श्रावण मास में वेवर महादेव सेवा समिति द्वारा यज्ञ, हवन और प्रसादी के अनुष्ठान किए जाते हैं। सावन भर भगवान महादेव का अभिषेक, यज्ञ, हवन और पूजा-पाठ चलता रहता है। राजसमंद जिले सहित पड़ोसी जिलों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।आमेट नगर के प्रमुख आराध्य देव भगवान महादेव का यह प्राचीन शिवालय आज भी आस्था के प्रमुख महाधाम के रूप में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है।

Updated on:
03 Aug 2026 06:00 am
Published on:
03 Aug 2026 06:00 am