उदयपुर

लोकसभा में सांसद ने जयसमंद के लिए उठाई ये मांग, इससे आसपास के ग्रामीणों और उदयपुर शहर को होगा ये फायदा

उदयपुर. जयसमंद झील को सदैव भरी रखने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए।

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Dec 29, 2017

उदयपुर . जयसमंद झील को सदैव भरी रखने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए। इससे आसपास के ग्रामीणों और उदयपुर शहर को कृषि और पीने के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही इस झील से प्रभावित होकर कई पर्यटक आएंगे। यह मांग लोकसभा में सांसद अर्जुनलाल मीणा ने गुरुवार को उठाई। मीणा ने लोकसभा में नियम 377 के तहत जयसमन्द झील को सदैव पानी से भरी रखने की मांग की।

उन्होंने सरकार से कहा कि मैं उदयपुर लोकसभा क्षेत्र में स्थित एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित मीठे पानी की झील जयसमन्द की तरफ ध्यान दिलाना चाहता हूं, जो किसी जमाने में 9 नदियों व 99 नालों के पानी से भरी रहती थी। जयसमन्द झील आवक मार्गों में अवरोधों एवं बहाव क्षेत्र में निर्मित छोटे-छोटे एनीकटों से पूरी तरह से भर नहीं पा रही है। जयसमन्द झील के बहाव व केचमैन्ट क्षेत्र में कई गांवों के परिवारों की आय सिर्फ कृषि पर निर्भर है।

वे जीवनयापन के लिए जयसमन्द झील से सिंचाई पर ही निर्भर है, लेकिन कई बार झील खाली रहने पर उनको सिंचाई से वंचित रहना पड़ता है। उन्होंने सदन को बताया कि उदयपुर विश्व पर्यटन मानचित्र पर भी अपना विशेष स्थान रखता है। प्रतिवर्ष हजारों देशी-विदेशी पर्यटक इस जयसमन्द झील को देखने आते हैं, परन्तु झील को खाली देखकर उनको मायूस होकर लौटना पड़ता है।


अनास व माही के पानी से भरें
सांसद ने बताया कि अनास व माही नदी से व्यर्थ बहकर जाने वाले पानी को नागलिया पिकअप वियर में डालकर जाखम के कमाण्ड क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा दी जा सकती है जिससे जाखम बांध का बचा हुआ 4671 एमसीएफटी एवं रास्ते की करमोई नदी का 600 एमसीएफटी, सुखेल नदी का 800 एमसीएफटी एवं रास्ते की अन्य नदी-नालों का 500 एमसीएफटी सहित कुल 6571 एमसीएफटी पानी जयसमन्द झील की मांग के अनुरूप 106 किलोमीटर लम्बी खुली नहर अथवा 17 किलोमीटर सुरंग एवं 44 किलोमीटर खुली नहरसे गुरुत्वाकर्षण प्रवाह से जयसमन्द झील में डाला जा सकता है।

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Published on:
29 Dec 2017 03:19 pm
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