
उदयपुर . प्रदेश में बड़े किसान आंदोलन की चिंगारी सुलग चुकी है जिसका आगाज 28 सितंबर को जयपुर में होगा। इसका नेतृत्व भारतीय किसान संघ करेगा। संघ ने अपने करीब 3 लाख किसान सदस्यों को सडक़ों पर उतारने की तैयारी कर ली है।
आंदोलन के लिए सभी तहसीलों में किसानों की बैठकें हो चुकी है। कलेक्टर व मंत्रियों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। जयपुर में भारतीय किसान संघ की 28 सितंबर को प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक होगी जिसमें आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप देकर ऐलान कर दिया जाएगा। सरकार सीकर में हुए किसान आंदोलन की तैयारी की थाह नहीं ले पाई थी। उसी तरह के हालात इस बार भी उत्पन्न होने के आसार हैं।
इसलिए आई आंदोलन की नौबत
जून 2017 में भारतीय किसान संघ ने किसानों की समस्याओं व मांगों को लेकर चार जगह महापड़ाव डाले थे लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा। संघ ने जैसे ही ग्राम से संग्राम आंदोलन की घोषणा की वैसे ही सरकार ने बातचीत की और संघ 72 में से 57 मांगें मान ली, लेकिन इनमें से ज्यादतर पर अभी तक कोई अमल नहीं हुआ। न उपज के खरीद केन्द्र खोले और न ही जो उपज खरीदी गई थी उसके बकाया का एक महीने में भुगतान किया। 6 घंटे बिजली देने के बजाय अघोषित बिजली कटौती की। ऐसी ही ज्यादातर मांगों पर अभी तक कोई काम नहीं किया।
किसान अधिकार यात्रा का दूसरा चरण
किसान महापंचायत भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद और ग्राम पंचायत स्तर पर खरीद केन्द्र खोलने जैसी किसानों की मांगों को लेकर आंदोलनरत है। महापंचायत के राष्ट्रीय संयोजक रामपाल जाट ने बताया कि उनकी किसान अधिकार यात्रा का पहला चरण समाप्त हो चुका है। अब दूसरा चरण शुरू होगा। आगामी चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस भी किसानों की समस्याओं के जरिए सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है, ऐसे में प्रदेश के हालात और बिगड़ सकते हैं।
जून 2017 में भारतीय किसान संघ ने किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन किया था, तब सरकार से जिन बिन्दुओं पर समझौता हुआ था, उनमें से ज्यादातर मांगों पर सरकार ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद ग्राम से संग्राम आंदोलन का निर्णय कर तहसीलों में बैठकें की। सीएम के नाम ज्ञापन सौंपे। जयपुर में 28 सितंबर को बड़ी बैठक बुलाई है जिसमें आंदोलन का आगाज किया जाएगा। संघ के करीब 3 लाख किसान सदस्य इसमें शामिल होंगे और सडक़ों पर उतरेंगे।
प्रवीण सिंह चौहान, प्रदेश मंत्री भारतीय किसान संघ