उदयपुर

लेकसिटी से कुम्भलगढ़ जाएं तो जरा सम्भलकर, इस राह पर जान हथेली पर लेकर गुजरना पड़ेगा

75 किलोमीटर लम्बे टूरिज्म कॉरिडोर में दर्जनभर से ज्यादा ब्लेक स्पॉट, दो तालाबों पर रिटेनिंग वॉल नहीं होने से हर पल नाचती रहती है मौत
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Nov 12, 2019
लेकसिटी से कुम्भलगढ़ जाएं तो जरा सम्भलकर, इस राह पर जान हथेली पर लेकर गुजरना पड़ेगा
लेकसिटी से कुम्भलगढ़ जाएं तो जरा सम्भलकर, इस राह पर जान हथेली पर लेकर गुजरना पड़ेगा

जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. टूरिस्ट सिटी उदयपुर से लेकर विश्वविरासत कुम्भलगढ़ तक 75 किलोमीटर का सफर देश-विदेश के लाखों सैलानियों के लिए खतरों से भरा है। प्रतिवर्ष इस रास्ते पर पांच लाख से ज्यादा पर्यटक सफर करते हैं, लेकिन पिछले आठ साल से यह सड़क इस कदर टूटी पड़ी है कि उन्हें अपनी जान हथेली पर लेकर चलना पड़ता है।
उदयपुर और राजसमंद जिले की सीमा में बंटे इस महत्वपूर्ण टूरिज्म कॉरिडोर की दशा सुधारने पर पिछली तीन सरकारों ने कोई ध्यान नहीं दिया। हालात ये हैं कि कहीं फोरलेन, कहीं डबल, तो कहीं सिंगल रोड है। मार्ग में डेढ़ से दो-दो फीट तक सैकड़ों गहरे गडï्ढे हैं। टैक्सी संचालक भी इस रास्ते पर गाडिय़ां ले जाने से कतराने लगे हैं, जिसका सीधा असर पर्यटन पर पड़ रहा है। उदयपुर से कुम्भलगढ़ जाते-जाते पर्यटकों की संख्या आधी से भी कम रह जाती है।

ऐसी है प्रसिद्ध पर्यटन गलियारे की दशा

ईसवाल तक 25 किमी तक उदयपुर-पिण्डवाड़ा फोरलेन बना है। आगे लोसिंग तक 15 किमी मार्ग स्टेट हाइवे है। इस टुकड़े की हालत बेहद खराब है। डामर पूरी तरह उखड़ चुका। धूल-मिट्टी उड़ती रहती है, वहीं खतरनाक गहरे गड्ढे हैं। लोसिंग चौराह से बरवाड़ा तक 15 किमी की सिंगल पूरी खराब है।

पटरी से नहीं उतरने पर होते हैं झगड़े
लोसिंग चौराह से बरवाड़ा तक दोनों किनारों पर जमीन समतल नहीं होने से दुर्घटना की आशंका में दोनों तरफ से आते-जाते वाहनचालक साइड देने से परहेज करते हैं। ऐसे में उनमें आए दिन तू-तू, मैं-मैं झगड़ा होता रहता है। कभी-कभार एक घंटे तक पर्यटक आपस में झगड़ते रहते हैं और जाम में सैकड़ों गाडिय़ां फंसी रहती हैं। बाघेलों का गुड़ा मोड़, अमरचंदिया बांध, तुला से कठार के बीच दो किलोमीटर मार्ग में तीन-चार खतरनाक मोड़ हैं। अंधे मोड़ बेहद खतरनाक हैं।

तालाब में कार समेत डूब गए थे तीन सैलानी

अमरचंदिया बांध व कुम्भलगढ़ क्षेत्र में ओड़ा तालाब के किनारे से यह मार्ग गुजरता है, जहां रिटेनिंग वॉल नहीं है। विकट मोड़ में गाडिय़ां तालाब में गिरने का खतरा रहता है। कुछ साल पहले अन्दर गिरे एक वाहन मे लोग बाल-बाल बच गए थे। हाल ही में गुजरात से उदयपुर के रास्ते कुम्भलगढ़ जा रहे तीन युवकों की कार ओड़ा तालाब में गिरने से उनकी मौत हो गई।

इतना भी नहीं कर सकी सरकार
वैकल्पिक तौर पर लोसिंग से बरवाड़ा तक सिंगल रोड पर दोनों तरफ पटरियों पर भराव करके सड़क के समानांतर किया जाए, तो दशा थोड़ी सुधर सकती है। लोसिंग से ईसवाल तक पेचवर्क करने से हादसे रोके जा सकते हैं।

दिल्ली-जयपुर वालों का भी सफर नहीं आसान

अजमेर, जयपुर, दिल्ली, मारवाड़ की ओर से आने वाले पर्यटकों को भी कुम्भलगढ़-चारभुजा मार्ग में ठिठकने लगते हैं। यह रास्ता पूरी तरह खराब हो चुका है।

दिवाली बाद बड़ा सीज
दीपावली के बाद फरवरी तक छुट्टियों में प्रतिदिन चार से पांच हजार सैलानी हर रोज उदयपुर से कुम्भलगढ़ जाते हैं। पूरे साल सप्ताहांत में शुक्रवार से रविवार तक भारी भीड़ उमड़ती है। खराब सड़कों पर गाडिय़ों का मेंटेनेंस बढऩे से टैक्सी संचालक किराया भी ज्यादा वसूलते हैं।

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राजस्थान में टूरिज्म के ये दोनों महत्वपूर्ण केन्द्र हैं। खराब सड़कों से सैलानियों में गलत संदेश जाता है। इस गलियारे पर परिवहन सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है।
शिखा सक्सेना, उप निदेशक, पर्यटन विभाग

इसवाल-लोसिंग तक टुकड़े पर पेचवर्क शुरू कर दिया गया है। अगले सात दिनों में काम पूरा हो जाएगा। आगे का रास्ता नेशनल हाइवे के प्लान में है। पूरे गलियारे को ठीक करना सरकार के स्तर का मामला है।

अशोक शर्मा, एसइ, पीडब्लयूडी, उदयपुर

Updated on:
12 Nov 2019 11:56 pm
Published on:
12 Nov 2019 11:56 pm