
उदयपुर/ झाड़ोल. lady IAS ग्रामीण महिलाओं के प्रसव दर्द को लेकर जिले का चिकित्सा महकमा भले ही अनदेखी करे, लेकिन प्रशासनिक ओहदे पर रहते हुए भी प्रशिक्षु महिला प्रशासनिक अधिकारी (आइएएस) से ग्रामीण गर्भवतियों का यह दर्द नहीं देखा गया। उपखण्ड अधिकारी का 'दिल पसीजाÓ और उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारी के अलावा शेष समय में स्थानीय महिलाओं को स्त्री रोग विशेषज्ञ की सेवाएं देना 'जुनूनÓ बना लिया। अब ये हाल है कि अवकाश के दिन भी वह ग्रामीण महिलाओं को सेवा देने का कोई मौका नहीं छोड़ती। इतना ही नहीं रात के समय भी आपात सेवाओं के तहत उपखण्ड अधिकारी महिलाओं का प्रसव करा रही हैं। स्थिति में सुधार ही है एसडीएम की मौजूदगी के बाद से क्षेत्र से नहीं के बराबर प्रसव केस को उदयपुर मुख्यालय के लिए रैफर हो रहे हैं।
जी हां! पाठक के तौर पर हर किसी की उत्सुकता ऐेसे किरदार को जानने की है तो आपको बता दें कि झाड़ोल में बतौर उपखण्ड अधिकारी सेवारत प्रशिक्षु आइएएस डॉ. टी शुभमंगला इन दिनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवतियों के लिए उम्मीदों की आस बनी हुई है। राजकीय चिकित्सालय में बीते 11 साल से स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। उपखण्ड अधिकारी का पद्भार संभालने के साथ ही किए गए निरीक्षण में महिला रोग विशेषज्ञ के रिक्त पद को जानने और स्थानीय महिलाओं की समस्या को समझने के बाद उन्होंने सीएचसी पर सेवाएं देने का मानस बनाया।
छुट्टी के दिन जांची 50 गर्भवती
राजकीय अवकाश के दिन जब हर प्रशासनिक अधिकारी घर पर आराम करता है या फिर कहीं बाहर घूमने-फिरने की प्लानिंग भी बनाते हैं। इसके उलट छुट्टी के दिन भी उपखण्ड अधिकारी ने 6 ओपीडी में बैठकर करीब 50 गर्भवतियों को स्वास्थ्य सेवाएं दी। इतना ही नहीं अधीनस्थ चिकित्सा स्टाफ को भी ड्यूटी के मामले में पाबंद किया है। उन्हें स्वास्थ्य जांच, हीमोग्लोबिन, वजन, ब्लड प्रेशर, शुगर और अन्य जांचों के प्रति गंभीरता दिखाने को कहा।
20 दिन में दो केस रैफर
करीब 20 दिन पहले प्रशासनिक पद संभालने वाली उपखण्ड अधिकारी की इस सेवा अवधि के दौरान स्थानीय सीएचसी से अब तक केवल दो ही केस उदयपुर मुख्यालय को रैफर किए गए हैं। पुराने रिकॉर्ड टटोले तो इससे पहले प्रतिदिन एक केस उदयपुर मुख्यालय को रैफर किया जाता था। रैफर मामलों में हाईरिस्क प्रेगनेंसी केस शामिल हैं।
सीएचसी में नाश्ता सुविधा
एक नई बात और सामने आई। सीएचसी पर आने वाली गर्भवती को अबसे पहले तक किसी प्रकार की सुविधा नहीं थी, लेकिन मंगलवार को जांच कराने आई महिलाएं दंग रह गई। महिलाओं को सामुदायिक केंद्र पर नाश्ते की सुविधा मिली। पहली बार गर्भवतियों को चाय, नाश्ता व बेहतर नाश्ते की सुविधा मिली। इतना ही नहीं ड्यूटी ऑवर्स में चिकित्सालय में मौजूद एडीएम को देखकर पूरे स्टाफ को मौके पर रहकर स्वास्थ्य सेवाएं देनी पड़ी। डॉ. हरिओम चौधरी, डॉ. राहुल गोरख की उपस्थिति में यहां का ओपीडी मंगलवार को 200 रहा।
पत्रिका व्यू....
किसी अवतार से कम नहीं!
पहले एमबीबीएस और फिर आईएएस होकर भी गरीब तबके की महिलाओं के लिए उपखण्ड अधिकारी डॉ. टी शुभमंगला के हृदय में इतना मर्म सराहनीय है। एक ओर गर्भवती महिलाओं के लिए उनका मन सेवा को लालायित है तो दूसरी ओर नवरात्र में 'कालरात्रिÓ का स्वरूप धारण कर उन्होंने क्षेत्र के झोलाछाप चिकित्सकों की खैर खबर ले रखी है। कोटड़ा जैसे उपखण्ड में झोलाछाप पनप रहे हैं तो झाड़ोल में उपखण्ड अधिकारी की धमक से छोलाछापों की दुकान पर संकट आ बना है। lady IAS स्थानीय ग्रामीण महिलाओं के लिए तो उपखण्ड अधिकारी की मौजूदगी किसी अवतार से कम नहीं है।