
नहीं मिलता पूरा उपचार, प्रसव संख्या में भी गिरावट
अदवास . सरकार की ओर से नि:शुल्क दवा, नि:शुल्क जांच समेत कई तरह की चिकित्सा योजनाएं संचालित है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर स्थिति दयनीय है। बरसात के साथ ही जल जनित मौसमी बीमारियों के प्रकोप से हर कोई आहत है, वहीं सरकारी तौर पर चिकित्सा सुविधाओं का भारी अभाव है। इसी को लेकर राजस्थान पत्रिका ने हर गांव-कस्बे तक पहुंचकर पड़ताल की है। जावद पीएचसी की रिपोर्ट-
सराड़ा उपखण्ड क्षेत्र के जावद गांव में स्थित राजकीय आदर्श प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र पर अदवास, जावद, नईझर, सेमाल ग्राम पंचायतों के २० गांवों की करीब २५ हजार आबादी के स्वास्थ का जिम्मा जावद पीएचसी पर है।
केन्द्र पर दो नर्स, एक एएनएम, आशा सुपरवाइजर, स्वीपर, चपरासी के पद रिक्त होने से प्रसव व परिवार कल्याण के आकड़ों में गिरावट आ रही है। पहले मासिक २० जगह अब मात्र ६ प्रसव व 100 लोगों का आउटडोर रह गया है। केन्द्र पर २४ घण्टे स्टॉफ सुविधा नहीं मिलने के कारण लोगों का उदयपुर रेफ र कर दिया जाता है। परिवार कल्याण कार्यक्रम में लगातार ५ बार जिले में अव्वल रहने वाले केन्द्र पर लगातार आकड़ों में गिरावट आ रही है।
भवन में गिरता पानी
केन्द्र पर सफाईकर्मी व चपरासी नहीं होने के कारण अस्पताल परिसर में गन्दगी और जर्जर भवन में बरसात में छत टपकने की समस्या है। रात के समय में केन्द्र पर बिजली नहीं मिलने व पीने के पानी की माकुल व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीज, तीमारदारों और कर्मचारियों को परेशानी होती है।
पोस्टमार्टम नहीं होने से परेशानी
किसी की मौत होने और पोस्टमार्टम की आवश्यकता होने पर ग्रामीणों को झाड़ोल या सराड़ा तक का 40 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। वहां पहुंचते-पहुंचते सूर्यास्त हो जाए या डॉक्टर नहीं मिले तो पोस्टमार्टम अगले दिन होता है। लिहाजा गमदजा परिवार को बुरे हालात में भी रात गुजारनी पड़ती है। पुलिस और परिजनों को शव के लिए अस्पताल और आसपास में ही रात गुजारनी पड़ती है। यहां पोस्टमार्टम सुविधा नहीं होना २० गांवों को खलता है।
इनका कहना
जावद केन्द्र की सुविधाओं को बढ़ाने व केन्द्र को सीएचसी मे क्रमोन्नत करवाने के लिए कई बार पंचायत ने प्रस्ताव विभाग को भेजे है। आगे भी प्रयास करेंगे।
तेजुबाई मीणा, सरपंच, जावद
केन्द्र पर स्टॉफ की कम होने ओर प्रतिनियुक्ति की समस्या को लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों को समय-समय पर अवगत कराया गया है। स्वीपर व चपरासी के पद भर जाए तो यहां पोस्टमार्टम की सुविधा मिल सकती है।
डॉ. सतीश खराड़ी, पीएचसी प्रभारी
Published on:
08 Oct 2019 02:41 am
