महाराणा प्रताप जयंती से ठीक पहले मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने 9 मई के बजाय 'ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया' (17 जून) को जयंती मनाने की विशेष अपील की है।
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती को लेकर इस बार राजस्थान में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। महाराणा प्रताप की जयंती 9 मई से ठीक एक दिन पहले, मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने एक वीडियो संदेश जारी कर एक विशेष सार्वजनिक अपील की है। इस अपील ने 'अंग्रेजी कैलेंडर' और 'भारतीय पंचांग' के बीच की उस बहस को फिर से जीवंत कर दिया है, जो हमारी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी है।
सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने बेहद गंभीर और सांस्कृतिक शब्दों का चयन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे पर्व और महापुरुषों की तिथियां किसी 'तारीख' की मोहताज नहीं हैं, बल्कि वे सनातन संवत की कालगणना में रची-बसी हैं।
सालों से महाराणा प्रताप की जयंती अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 9 मई को मनाई जाती रही है। लेकिन मेवाड़ राजपरिवार और कई हिंदू संगठनों का तर्क है कि प्रताप का जन्म विक्रम संवत 1597 के ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ था।
सांस्कृतिक स्वाभिमान: लक्ष्यराज सिंह का मानना है कि जब हम अपने पारंपरिक पंचांग का अनुसरण करते हैं, तो हम केवल परंपरा नहीं निभाते, बल्कि अपनी विरासत को जीवंत बनाते हैं।
तारीख का भ्रम: हर साल अंग्रेजी तारीख बदलती है, लेकिन 'तिथि' के अनुसार उत्सव मनाने से वह हमारे पंचांग की शुद्धता को दर्शाता है।
पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश भर में महापुरुषों की जयंतियों को हिंदू कैलेंडर के अनुसार मनाने का सिलसिला शुरू हुआ है।