उदयपुर

Maharana Pratap Jayanti : पूर्व राजपरिवार सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की ‘सार्वजनिक अपील’, सभी को चौंकाया !

महाराणा प्रताप जयंती से ठीक पहले मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने 9 मई के बजाय 'ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया' (17 जून) को जयंती मनाने की विशेष अपील की है।
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May 08, 2026
Lakshyaraj Singh Mewar
Lakshyaraj Singh Mewar

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती को लेकर इस बार राजस्थान में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। महाराणा प्रताप की जयंती 9 मई से ठीक एक दिन पहले, मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने एक वीडियो संदेश जारी कर एक विशेष सार्वजनिक अपील की है। इस अपील ने 'अंग्रेजी कैलेंडर' और 'भारतीय पंचांग' के बीच की उस बहस को फिर से जीवंत कर दिया है, जो हमारी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी है।

पंचांग ही हमारी पहचान : लक्ष्यराज सिंह मेवाड़

सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने बेहद गंभीर और सांस्कृतिक शब्दों का चयन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे पर्व और महापुरुषों की तिथियां किसी 'तारीख' की मोहताज नहीं हैं, बल्कि वे सनातन संवत की कालगणना में रची-बसी हैं।

अपील के मुख्य बिंदु:

  • शाश्वत कालगणना: लक्ष्यराज सिंह ने कहा कि हमारे महापुरुषों की जन्म और पुण्य तिथियां मूलतः सनातन संवत (विक्रम संवत) में निहित हैं।
  • बदलता स्वरूप: उन्होंने खुशी जताई कि केंद्र और राज्य सरकारें अब महत्वपूर्ण उत्सवों को विक्रम संवत तिथियों के अनुसार मान्यता दे रही हैं।
  • 17 जून का संकल्प: लक्ष्यराज सिंह ने आह्वान किया कि इस वर्ष महाराणा प्रताप की जयंती बुधवार, 17 जून 2026 (ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया) को पूरी श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई जाए।

अब तक 9 मई, अब 17 जून क्यों?

फाइल फोटो पत्रिका

सालों से महाराणा प्रताप की जयंती अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 9 मई को मनाई जाती रही है। लेकिन मेवाड़ राजपरिवार और कई हिंदू संगठनों का तर्क है कि प्रताप का जन्म विक्रम संवत 1597 के ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ था।

सांस्कृतिक स्वाभिमान: लक्ष्यराज सिंह का मानना है कि जब हम अपने पारंपरिक पंचांग का अनुसरण करते हैं, तो हम केवल परंपरा नहीं निभाते, बल्कि अपनी विरासत को जीवंत बनाते हैं।

तारीख का भ्रम: हर साल अंग्रेजी तारीख बदलती है, लेकिन 'तिथि' के अनुसार उत्सव मनाने से वह हमारे पंचांग की शुद्धता को दर्शाता है।

सरकार और परंपरा के बीच तालमेल

पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश भर में महापुरुषों की जयंतियों को हिंदू कैलेंडर के अनुसार मनाने का सिलसिला शुरू हुआ है।

  • सरकारी मान्यता: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के अनुसार, सरकार द्वारा तिथि आधारित उत्सवों को आधिकारिक स्वीकृति देना एक ऐतिहासिक कदम है।
  • सामूहिक शक्ति: मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार का मानना है कि जब पूरा समाज एक ही दिन (तिथि के अनुसार) उत्सव मनाएगा, तो उसकी गूँज और प्रभाव कहीं अधिक होगा।
Updated on:
09 May 2026 11:19 am
Published on:
08 May 2026 12:29 pm