उदयपुर

अब डिग्रियों की गुत्थी में उलझ गया उदयपुर का चिकित्सा विभाग

medical and health department झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ अभियान, होम्योपैथिक डिग्रियों की आड़ में चला रहे क्लीनिक
2 min read
अब डिग्रियों की गुत्थी में उलझ गया उदयपुर का चिकित्सा विभाग
अब डिग्रियों की गुत्थी में उलझ गया उदयपुर का चिकित्सा विभाग

उदयपुर/ गोगुंदा. medical and health department ग्रामीण स्वास्थ्य के प्रति संजीदगी दिखाते हुए क्षेत्र में झोलाछापों के खिलाफ अभियान छेडऩे वाले चिकित्सा विभाग के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। होम्योपैथिक चिकित्सा डिग्री और बहुउद्देेशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रमाण-पत्र के नाम पर संचालित क्लीनिक में एलोपैथिक दवाइयों के इस्तेमाल को लेकर विभाग नियम कायदे देख रहा है। उलझन यह भी है कि ऐसे क्लीनिकों में खुले में मरीजों को भर्ती कर ड्रिप चढ़ाई जा रही है। क्लीनिक के नाम पर भर्ती बेड भी लगाए हुए हैं। नियमों से हटकर ग्रामीणों के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर विभागीय चुप्पी ने एक बार फिर विभागीय जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थिति यह है कि सायरा स्वास्थ्य केंद्र के सामने ही एक होम्योपैथिक चिकित्सक की ओर से संचालित क्लीनिक में मरीजों को खुलकर भर्ती किया जा रहा है। लेकिन, दिखती हुई खामी को लेकर विभाग नियमों की किताब के पन्ने पलट रहा है।
30 किलोमीटर का घेरा
गोगुंदा से सायरा के बीच करीब 30 किलोमीटर के घेरे में झोलाछापों के क्लीनिक, होम्योपैथिक व स्वास्थ्य कार्यकर्ता के प्रमाण-पत्र पर संचालित हैं। आरोप है कि इन क्लीनिकों में आने वाले मरीजों पर स्टेरॉइड का उपयोग कर उन्हें तत्काल राहत पहुंचाने के दावे हो रहे हैं। जल्द राहत की आस लगाए मरीज को इस दवा से किडनी सहित आंखों के रोगों जैसी बीमारियां घेर रही हैं। पत्रिका की पड़ताल में जानकारों ने बताया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता और होम्योपैथिक डिग्रीधारक एलोपैथिक दवाओं की प्रेक्टिस के लिए अधिकृत नहीं है। हालांकि, महाराष्ट्र सहित देश के कुछ राज्यों में होम्योपैथिक व आयुर्वेद चिकित्सकों को निर्धारित एलोपैथिक दवाओं के उपयोग करने के अधिकार दिए हुए हैं, लेकिन राजस्थान में इस मामले में अभी कोई कायदे लागू नहीं है।

नहीं कर सकते प्रेक्टिस
सायरा में होम्योपैथिक चिकित्सक की ओर से क्लीनिक चलाने को लेकर पहले भी कार्रवाई हुई थी। थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। अब फिर से ऐसा हो रहा है तो कार्रवाई करेंगे। medical and health department नियमानुसार होम्योपैथिक चिकित्सा पद्वति से मरीजों को भर्ती कर उपचार नहीं किया जा सकता।
डॉ. ओ.पी. रायपरिया, बीसीएमओ, गोगुंदा

Published on:
09 Nov 2019 06:00 am