उदयपुर

नसबंदी से दूर भागते राजस्थान के पुरुष

महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की नसबंदी बेहद कम
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Jul 05, 2019
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भुवनेश पण्ड्या

उदयपुर. प्रदेश के पुरुष नसबंदी से दूर भाग रहे हैं। हालात ये है कि जहां महिलाएं हजारों की संख्या में नसबंदियां करवा रही हैं, वहीं पुरुषों की संख्या नगण्य है इसका कारण चिकित्सा विभाग भी नहीं बता पा रहा है, हालांकि इसमें ये जरूर माना जा रहा है कि इसमें कहीं ना कहीं पुरुषों का डर छुपा हुआ है।

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उदयपुर जिले में वर्ष 2019 (मार्च तक) में कुल 11229 नसबंदियां हुई, इनमें से 10892 महिलाओं ने करवाई, जबकि केवल 237 पुरुषों की हुई। इससे पहले बात की जाए तो गत वर्ष 2018 मार्च तक कुल 11144 नसबंदियां हुई हैं, जिनमें से 10850 महिलाओं ने नसबंदियां करवाई वहीं पुरुषों के नाम केवल 294 रही।

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पूरे राजस्थान में मार्च 19 तक कुल 2 लाख 59 हजार 47 नसबंदियां हुई, जिनमें से 2 लाख 55 हजार 960 महिलाएं व केवल 3087 पुरुषों ने नसबंदियां करवाई हैं। अन्य जिलों की बात की जाए तो पांच ऐसे जिले शामिल हैं, जिनमें पूरे वर्ष भर में अधिकतम 20 पुरुषों से भी कम ने नसबंदियां करवाई हैं, खास बात ये है कि इन्हीं जिलों में महिलाओं की संख्या हजारों में हैं।

जिला पुरुष/महिला

दौसा 17/7027

टोंक 11/5605

जैसलमेर 14/2903

करौली 14/6073

बाड़मेर 20/9064

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2018 में थे ये हाल: पूरे वर्ष में दस से भी कम वाले थे जिले

जिला पुरुष/महिला

बूंदी 7/4701

जैसलमेर 7/2615

बांसवाड़ा 9/5665

धौलपुर 4/4450

सिरोही 2/3218

डूंगरपुर 3/3518

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संभागीय जिलों के हाल (2019)

जयपुर प्रथम : कुल 14672 में 207 पुरुषों और 14465 महिलाओं ने नसबंदी करवाई।

जयपुर द्वितीय: कुल 7960 में 93 पुरुषों और 7867 महिलाओं

अजमेर : कुल 12216 में से 58 पुरुषों और 12158 महिलाओं

जोधपुर : कुल 11599 में से 30 पुरुषों और 11569 महिलाओं

बीकानेर: कुल 9119 में से 110 पुरुषों और 9009 महिलाओं

भरतपुर : कुल 9361 में से 16 पुरुष व 9345 महिलाओं

कोटा : कुल 7722 में से 116 पुरुषों ने और 7606 महिलाओं

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ये है मिथक : पुरुषों का नसबंदी में पीछे होने का मुख्य कारण ये मिथक है कि इससे पौरूषता में कमी नहीं आ जाए।

ये है परेशानी: पुरुषों से बात करने में अधिकांश महिलाओं में हिचक होती है, ये कार्य विभिन्न ब्लॉक में ज्यादातर महिलाएं ही करती हैं।

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ये है उदासीनता का मुख्य कारण:

पुरूषों का नसबंदी को लेकर उदासीनता होने का कारण विधियों का अभाव, मिथक और गलत धारणाओं का प्रचलन, सेवाओं तक पहुंच की कमी, सूचना और गर्भनिरोधक के उपलब्ध तरीकों पर परामर्श की कमी, उनके लाभ और दुष्प्रभाव और प्रबंधन तक पहुंच में कमी शामिल हैं। नसबंदी एक सुरक्षित, जल्द और आसान विकल्प है। लेकिन कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि भारतीय पुरुष इस प्रक्रिया से गुजरना नहीं चाहते हैं। उन्हें अपने पुरुषत्व को खोने का डर रहता है। देशभर में लैंगिक रूढि़वाद को तोडऩे, मिथकों को दूर करने व पुरुष भागीदारों को जिम्मेदार बनाने की रणनीतियों सहित पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए एक अभियान की आवश्यकता है।

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हमारी ओर से पूरे प्रयास जारी है, हम इसे लेकर समय-समय पर काउंसलिंग के जरिए पुरुषों की नसबंदियां बढ़ाने का प्रयास करते हैं। नसबंदी करवाने से पुरुषों को कोई परेशानी नहीं होती।

डॉ रागिनी अग्रवाल, अतिरिक्त सीएमएचओ (परिवार कल्याण)

Updated on:
05 Jul 2019 08:30 am
Published on:
05 Jul 2019 07:30 am