कन्हैयालाल सोनी सलूम्बर. नवगठित जिले सलूम्बर में मिनी सचिवालय के निर्माण को लेकर जिला प्रशासन ने नई रणनीति बना ली है। प्रशासन अब सरकारी जमीन और परिसंपत्तियों के ‘मॉनेटाइजेशन’ यानी व्यावसायिक उपयोग के जरिए 50 करोड़ रुपए जुटाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजते […]
सलूम्बर. नवगठित जिले सलूम्बर में मिनी सचिवालय के निर्माण को लेकर जिला प्रशासन ने नई रणनीति बना ली है। प्रशासन अब सरकारी जमीन और परिसंपत्तियों के 'मॉनेटाइजेशन' यानी व्यावसायिक उपयोग के जरिए 50 करोड़ रुपए जुटाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजते हुए साफ कहा है कि मिनी सचिवालय के लिए चिह्नित जमीन पर निर्माण अव्यावहारिक है, इसलिए वैकल्पिक भूमि तलाशी जाए और सरकारी परिसंपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता अपनाया जाए। जिला प्रशासन के इस प्रस्ताव ने नए जिले की पूरी योजना ही बदल दी है। सवाल उठता है कि क्या सरकार सलूम्बर में मिनी सचिवालय के लिए बजट नहीं देगी, क्या सलूम्बर को अपने विकास की राह खुद ही चुननी होगी।
नवगठित जिले में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए मिनी सचिवालय निर्माण की योजना लंबे समय से चल रही है। इसी कड़ी में जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को भेजे पत्र में बताया है कि पहले चिह्नित भूमि पर तकनीकी और भौगोलिक कारणों से निर्माण करना मुश्किल है। जिला प्रशासन का कहना है कि जिस जमीन को मिनी सचिवालय के लिए प्रस्तावित किया गया था, वह पहाड़ी और गहरी ढलान वाली है। ऐसे में वहां निर्माण कार्य न केवल महंगा पड़ेगा, बल्कि भविष्य में अन्य सरकारी कार्यालयों के विस्तार की संभावना भी सीमित हो जाएगी। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक जमीन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत वर्तमान में बस स्टैंड के पास स्थित कार्यालय परिसर और आसपास की सरकारी जमीन को पुनर्व्यवस्थित करने की योजना बनाई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि संबंधित विभागों के कार्यालयों को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाए और उस जमीन का व्यावसायिक उपयोग (मॉनेटाइजेशन) किया जाए।
तर्क: सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा
योजना के मुताबिक इस जमीन को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए विकसित कर उससे करीब 50 करोड़ रुपए की आय प्राप्त की जा सकती है। इसी राशि से मिनी सचिवालय भवन का निर्माण कराया जा सकेगा। जिला प्रशासन का तर्क है कि इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और जिले को एक व्यवस्थित प्रशासनिक परिसर भी मिल सकेगा।
जिला प्रशासन ने सरकार से मांगी अनुमति
फिलहाल इस संबंध में सरकार से अलग भूमि उपलब्ध कराने या प्रस्तावित भूमि के मॉनेटाइजेशन की अनुमति मांगी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान भूमि की परिस्थितियों के कारण वहां मिनी सचिवालय का निर्माण करना व्यवहारिक नहीं है, इसलिए जल्द निर्णय जरूरी है ताकि जिले में प्रशासनिक ढांचा समय पर विकसित हो सके।
क्या है 'मॉनेटाइजेशन'?
- पहले चिह्नित सरकारी संपत्ति या जमीन का आर्थिक उपयोग किया जाना
- जमीन लीज, कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स या अन्य व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए देना
- व्यावसायिक इस्तेमाल से प्राप्त राशि को किसी बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट में लगाना
- यानी जिला प्रशासन चाहता है कि संपत्ति को बेचे बिना उससे आय पैदा करना
लकापा में तलाशी जमीन
जिला प्रशासन ने बस्सी और ईसरवास के बाद शहर से साढ़े तीन किमी दूर लकापा में 6.60 हेक्टर जमीन का प्रस्ताव बनाया। प्रस्ताव 5 मार्च को राजस्व विभाग को भेजा और 9 मार्च को प्रमुख शासन सचिव को आबादी क्षेत्र में बस स्टैंड के समीप वर्तमान में संचालित पीडब्यूडी, विश्राम गृह, उपखंड व तहसीलदार कार्यालय, उपखण्ड अधिकारी निवास व जल संसाधन विभाग के कार्यालय परिसर को अन्य इस्तेमाल के लिए चुना है। यहीं के भवन में कलक्टर निवास भी है।
इनका कहना है...
अभी मामला चर्चा में चल रहा है, सरकार को नहीं भेजा है। अभी सोच रहे हैं। अभी सरकार ने कहा है कि इस तरह का प्लान बनाओ। उसके बाद कोई निर्देश नहीं आए की करना है या नहीं। उस हिसाब से सोच लिया था कि इसमें क्या रेवेन्यू हो सकती है। अंदरुनी गणित लगाई है। कोई निर्देश आएंगे तो आगे बढ़ेगे।
अवधेश मीना, कलक्टर, सलूम्बर