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फाइलों में ‘फुल’ पर ग्राउंड में ‘ड्राई’: तेल कंपनियों के खेल से पहियों पर ब्रेक, महंगाई को लगे पंख

उदयपुर सहित राजस्थान में डीजल संकट और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से ट्रांसपोर्ट, निर्माण कार्य और बाजार व्यवस्था प्रभावित हो गई है। मंडियों में फल-सब्जी, दाल और अन्य जरूरी सामान की आवक घटने से महंगाई बढ़ने लगी है, जबकि ट्रांसपोर्टरों और मजदूरों के सामने रोजगार संकट खड़ा हो गया।

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petrol price hike

file photo

उदयपुर. पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और डीजल की गंभीर किल्लत ने अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया। हालात इतने बिगड़ चुके कि ट्रांसपोर्ट कारोबार चरमराने लगा है, भारी मशीनों के पहिये थम गए, मंडियों में फल-सब्जी और खाद्यान्न की आवक घट रही है, जबकि महंगाई की नई मार से आमजन की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।गुजरात के कच्छ और मुंद्रा बंदरगाह क्षेत्रों में गहराए डीजल संकट का असर उदयपुर तक साफ दिखाई देने लगा है। उदयपुर से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक-ट्रेलर मार्बल, पत्थर, खनिज और औद्योगिक सामान लेकर गुजरात के बंदरगाहों तक जाते हैं, लेकिन वहां डीजल की उपलब्धता महज 50 से 100 लीटर तक सीमित होने से वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया। स्थिति यह है कि बंदरगाह तक पहुंचने वाले वाहन किसी तरह लौट तो रहे हैं, पर दोबारा जाने से कतरा रहे हैं। ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों का कहना है कि अगले कुछ दिन में हालात नहीं सुधरे तो माल ढुलाई व्यवस्था ठप हो सकती है, जिसका असर उद्योगों से लेकर आम घरों की रसोई तक पड़ेगा।

डीजल के लिए भटक रहे चालक

उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी डीजल की उपलब्धता तेजी से घट रही है। कई पेट्रोल पंपों पर 100 से 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जा रहा। ट्रक चालक अलग-अलग पेट्रोल पंपों पर जाकर टुकड़ों में डीजल भरवा रहे हैं। कई बार घंटों लाइन में लगने के बाद भी पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि 400 से 500 लीटर क्षमता वाले वाहनों को भरने के लिए चार-पांच पंपों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे समय, श्रम और धन तीनों की भारी बर्बादी हो रही है। कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने फिलहाल नए वाहन भेजना कम कर दिया है।

बोरवैल और निर्माण कार्य प्रभावित

डीजल संकट का सबसे बड़ा असर भारी मशीनों और निर्माण कार्यों पर पड़ा है। बोरवेल, पोकलेन, जेसीबी और खुदाई मशीनों का संचालन प्रभावित हो गया। कई जगह मशीनें बंद पड़ी हैं। पहले जहां रोज दो से तीन बोरिंग हो जाती थी, अब एक भी काम नहीं हो पा रहा। डीजल की अनुपलब्धता के कारण मशीन मालिकों और मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

मंडियों में घट रही आवक

डीजल संकट अब सीधे आमजन की रसोई तक पहुंच चुका है। फल-सब्जी, दाल, अनाज, मसाले और ड्राई फ्रूट्स की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। व्यापारियों का कहना है कि वाहनों की कमी और बढ़े हुए भाड़े के कारण माल महंगा हो रहा है। मंडियों में रोजाना आने वाले वाहनों की संख्या घट गई है। व्यापारियों को समय पर माल नहीं मिल रहा, जिससे बाजार में उपलब्धता प्रभावित होने लगी है। यदि यही हालात रहे तो आने वाले दिनों में रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम और तेजी से बढ़ सकते हैं।---

कंपनियों पर स्टॉक रोकने का आरोप, पंप संचालकों ने खोली पोल

व्यापारियों और पेट्रोल पंप संचालकों ने तेल कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंपनियां घाटे का हवाला देकर जानबूझकर डीजल की सप्लाई सीमित कर रही हैं। पंप संचालकों के अनुसार, कंपनियों ने निर्देश दे रखे हैं कि कोई भी पंप ड्राई नहीं दिखना चाहिए। इसके लिए हर पंप पर कुछ हजार लीटर स्टॉक बनाए रखने को कहा जा रहा है, ताकि कागजों में स्थिति सामान्य दिखाई दे। संचालकों का कहना है कि हकीकत यह है कि उन्हें पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही। कई बार अधिक बिलिंग होने पर सप्लाई रोकने जैसी स्थिति भी बन रही है। उनका आरोप है कि कंपनियां मंत्रालय तक गलत आंकड़े भेजकर वास्तविक संकट को छिपा रही हैं।

बंदरगाहों पर काम बंद करने की चेतावनी

कच्छ जिले के परिवहन और मालवाहक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 21 मई तक डीजल सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो बंदरगाहों पर माल चढ़ाने और उतारने का कार्य बंद कर दिया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो राजस्थान सहित कई राज्यों की औद्योगिक और व्यापारिक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ेगा। उद्योगों को कच्चा माल नहीं मिलेगा और तैयार माल की सप्लाई भी बाधित होगी।

व्यवसायियों की जुबानी संकट की तस्वीर

फल-सब्जी की गाड़ियों की आवक कम हो रही है, जिससे मंडियों में असर साफ दिखाई देने लगा है। डीजल महंगा होने और पर्याप्त नहीं मिलने से ट्रांसपोर्ट लागत तेजी से बढ़ी है। यदि यही हाल रहे तो आने वाले दिनों में आम आदमी की रसोई पर सीधी महंगाई की मार पड़ेगी।

मुकेश खिलवानी, श्री सब्जी फ्रूट व्यापारी एसोसिएशन

पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दामों से ट्रांसपोर्ट खर्च तेजी से बढ़ा है और इसका असर सीधे बाजार पर दिखाई दे रहा है। ड्राई फ्रूट्स और मसालों के दाम 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। ग्राहकी पहले से कमजोर है और व्यापारियों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

अनिल मेहता, कल्याण ड्राई फ्रूट

डीजल संकट के कारण माल समय पर नहीं पहुंच पा रहा और ऑर्डर आने के बाद भी कई दिन की देरी हो रही है। पहले जो भाड़ा सामान्य था, वह अब लगभग दुगुना हो चुका है। यदि यही स्थिति रही तो बाजार में जरूरी वस्तुओं की कमी और महंगाई दोनों तेजी से बढ़ेंगी।

राजकुमार चित्तौड़ा, महामंत्री, उदयपुर दाल चावल व्यापार संघ

पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सीधा असर कपड़ा कारोबार पर पड़ा है और बाजार की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। सूरत और मुंबई से माल की आवक कम हो गई है, जिससे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। ग्राहकी में करीब 40 प्रतिशत गिरावट दर्ज की जा रही है।

अजय पोरवाल, अध्यक्ष, होलसेल क्लॉथ संस्थान

पेट्रोल-डीजल के दामों ने व्यापार की लागत को हर स्तर पर बढ़ा दिया है। बाजार पहले से मंदी और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था, अब हालात और खराब हो गए हैं। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो कई कारीगरों और छोटे व्यापारियों के सामने पलायन की नौबत आ सकती है।

इंदर सिंह मेहता, संरक्षक, श्री राजस्थान सर्राफा संघ

डीजल की किल्लत के कारण बोरवेल और नलकूप खुदाई का काम ठप हो गया। रोजाना 700 से 800 लीटर डीजल की जरूरत होती है, लेकिन मुश्किल से 100-200 लीटर ही मिल पा रहा है। मशीनें बंद पड़ी हैं और मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।दिलीप माहेश्वरी, बोरवेल संचालक---डीजल नहीं मिलने से ट्रांसपोर्ट कारोबार पूरी तरह चरमरा गया और कई वाहन खड़े करने पड़े हैं। रोज आधा समय सिर्फ डीजल की व्यवस्था में निकल जाता है, फिर भी पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा। 66 मजदूरों में से अधिकांश हटा दिए, क्योंकि काम लगभग बंद हो चुका है।

नरेश जैन, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी, गोवर्धनविलास

एक नजर में संकट

- उदयपुर से रोज सैकड़ों वाहन मुंद्रा बंदरगाह जाते हैं- कई पंपों पर 100-200 लीटर डीजल की सीमा

- ट्रांसपोर्ट, बोरवेल और मशीनरी कारोबार प्रभावित- मंडियों में फल-सब्जी और खाद्यान्न की आवक घटी

- भाड़ा बढ़ने से महंगाई बढ़ने की आशंका- कंपनियों पर सप्लाई रोकने और स्टॉक करने के आरोप

- 21 मई से बंदरगाहों पर काम रोकने की चेतावनी