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Udaipur News: बलात्कार के प्रयास का मामला; भाजपा नेता की मुश्किलें बढ़ीं, गिरफ्तारी से रोक हटी

उदयपुर के घंटाघर थाने में एक साल पहले सामने आए बलात्कार के प्रयास के मामले में जोधपुर हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक हटा दी है। ऐसे में आरोपी भाजपा नेता अनिल जारौली की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मामले में पीड़ित पक्ष ने आइजी और एसपी को ज्ञापन देकर जल्द कार्रवाई की मांग की है।

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Udaipur Rape Case

सांकेतिक तस्वीर

Udaipur Rape Attempt Case : उदयपुर। घंटाघर थाने में एक साल पहले सामने आए बलात्कार के प्रयास के मामले में जोधपुर हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक हटा दी है। ऐसे में आरोपी भाजपा नेता अनिल जारौली की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मामले में पीड़ित पक्ष ने आइजी और एसपी को ज्ञापन देकर जल्द कार्रवाई की मांग की है।

घटना 5 जून 2025 की है, जिस पर शिकायतकर्ता ने 6 जून को एफआइआर दर्ज कराई थी। इसके अगले दिन आरोपी पक्ष की ओर से भी मामला दर्ज कराया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि एफआइआर में बलात्कार के प्रयास और पीड़िता के घर में घुसकर छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में अदालत इस स्तर पर हस्तक्षेप करने के पक्ष में नहीं है। इसी के साथ 4 अगस्त 2025 को दिया गया स्थगन आदेश निरस्त कर दिया गया। हाईकोर्ट ने मामले में आरोपी अनिल जारौली को पहले मिली अंतरिम राहत समाप्त कर दी। न्यायाधीश मुननुरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर है और इसकी जांच आवश्यक है।

झूठी निकली आरोपी की ओर से दर्ज रिपोर्ट

बलात्कार के प्रयास के आरोपी अनिल जारौली की ओर से सविना थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसमें व्यावसायिक साझेदारी को लेकर मारपीट, धमकी और धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। मामले में पुलिस जांच के बाद केस झूठा मानते हुए एफआर पेश की गई। जांच में पाया कि घटना के समय शिकायतकर्ता और आरोपी, दोनों की मोबाइल लोकेशन घटनास्थल पर नहीं थी। इसके आधार पर पुलिस ने मामले को मनगढ़ंत मानते हुए अदालत में अंतिम रिपोर्ट पेश की। पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि जारौली ने घंटाघर थाने में दर्ज केस के दबाव में यह रिपोर्ट दी।

यह था मामला

पीड़ित पक्ष की ओर से दर्ज एफआइआर में बताया गया कि आरोपी जारौली अपने परिजन और बदमाशों के साथ पीड़िता के घर में दाखिल हुआ था। आरोप है कि जान से मारने की नीयत से घर में घुसकर बवाल मचाया और अभद्रता की। इस दौरान पीड़िता के साथ बलात्कार के प्रयास और लज्जा भंग की गई। केस दर्ज होने पर तत्कालीन एसपी योगेश गोयल और तत्कालीन सीआइ सुनील शर्मा में भी ठन गई थी। कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में उदयपुर बार एसोसिएशन ने भी कार्य बहिष्कार कर प्रदर्शन किया था।