उदयपुर

उदयपुर में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नुकसान का मामला पहुंचा जिला प्रशासन तक, कलक्टर ने मांगा जवाब

उदयपुर. मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय की ओर से इस बार विभिन्न पदों पर की जा रही भर्ती के लिए तैयार हुए रोस्टर पर घमासान छिड़ गया है।
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Jun 04, 2018
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उदयपुर . मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय की ओर से इस बार विभिन्न पदों पर की जा रही भर्ती के लिए तैयार हुए रोस्टर पर घमासान छिड़ गया है। विश्वविद्यालय में इस बार जारी रोस्टर नियमों में आरक्षण के नियमों की अवहेलना कर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचाने पर उठे सवालों का मामला जिला प्रशासन तक पहुंचा और विवि को बकायदा कलक्टर को स्पष्ट करना पड़ा। खास बात यह है कि इन नियमों से अब तक करीब 30 पदों पर भर्तियां हो चुकी हैं।

भर्तियों पर उठे सवालों में पुराने बैकलॉग की पालना नहीं करने और आरक्षण नियमों को ताक पर रखने का मामला उठा है, हालांकि विवि प्रशासन रोस्टर को पूरी तरह सही और नियमानुसार बता रहा है।

आवाज उठाई तो मिले कड़े नोटिस
गत दिनों मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक रोस्टर संघर्ष समिति की ओर से इस बार हो रही भर्ती में आरक्षण रोस्टर नियमों की अवहेलना करने का मामला उठाया गया। जिसने भी इस मामले में कदम बढ़ाया उसे कुल सचिव ने ऐसा नहीं करने को लेकर कड़े पत्र लिखे ।

आरक्षित श्रेणी के पदों को भरने में मर्जी
1 अगस्त17 को जारी विज्ञापन के अनुसार भौतिकशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कुल तीन पदों में 0 सामान्य वर्ग, 1 ओबीसी, 1 एसटी व 1 एससी के पद थे, जबकि नए विज्ञापन 6.2.18 के अनुसार कुल तीन पदों पर एक सामान्य वर्ग, एक ओबीसी व एक एसटी के पद दिखाए गए, इसमें एससी का पद बदलकर 0 कर दिया गया।

- 1.8.17 को जारी विज्ञापन के अनुसार रसायन शास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल 6 पदों में से तीन सामान्य वर्ग, दो ओबीसी, एक एसटी व 0 एससी के पद थे, जबकि नए विज्ञापन 6.2.18 के अनुसार कुल 11 पदों पमें 6 सामान्य वर्ग, तीन ओबीसी, दो एसटी व 0 एससी के पद थे, जबकि विवि ने 23.318 को नए विज्ञापन को जारी कर कुल 11 पदों में 7 सामान्य, दो ओबीसी, 2 एसटी व 0 एससी के पदों को दर्शाया।

- 1.8.17 को जारी सांख्यिकी विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कुल दो पदों में से एक सामान्य, एक ओबीसी, 0 एसटी व 0 एससी पद थे, जबकि 6.2.18 को जारी विज्ञापन में कुल दो पदों में सभी दो पद सामान्य वर्ग के दर्शा दिए।
- विश्वविद्यालय में माइक्रोबायोलॉजी विषय स्वतंत्र विभाग नहीं है, जो बायोटेक्नोलॉजी विभाग की एक उप इकाई है, लेकिन रोस्टर को दरकिनार कर इसे स्वतन्त्र इकाई मानते हुए पद विज्ञापित किया गया, इससे आरक्षित वर्ग को नुकसान हुआ है।

- सांख्यिकी विषय भी स्वतंत्र विभाग नहीं है, यह गणित व सांख्यिकी विभाग की एक इकाई है, फिर भी रोस्टर को दरकिनार कर इसे स्वतंत्र माना गया।

विश्वविद्यालय का मत: कलक्टर के सवाल पर कुल सचिव ने दिया जवाब

- यूजीसी व राज्य सरकार के नियमानुसार शैक्षणिक पदों की भर्ती का रोस्टर विभागवार व कैडरवाइस तैयार होता है। रोस्टर के नियमानुसार किसी भी सीधी भर्ती में ओबीसी का पांचवां, एससी का सातवां, एसटी का नवां पद बनता है। वर्तमान में अधिकांश विभागों में एक-एक पद ही स्वीकृत है, ऐसे में आरक्षण का प्रावधान नहीं बनता।
- पूर्व में गठित कमेटी के अनुशंसाओं के आधर पर तैयार रोस्टर को विवि ने फिर से विशेषज्ञों द्वारा जांचने पर भौतिक शास्त्र विषय में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण के नियमों की अवहेलना होना पाया गया। इसी आधार पर विषय के रोस्टर को फिर से निर्धारित किया गया, इसमें पदों के आवंटन में बदलाव हुआ।

- पूर्व में गठित रोस्टर कमेटी ने अलग-अलग विषयों में विभिन्न पदों पर रोस्टर तैयार किया था, लेकिन सरकार से प्राप्त अनुमति के आधार पर अब पदों की संख्या बढऩे से इसमें बदलाव हुआ है। साथ ही गणित व सांख्यिकी विषयों की विषयवस्तु व शिक्षकों की वांछित योग्यता में भिन्नता होने के कारण दोनों विषयों का रोस्टर अलग-अलग तैयार किया गया, इसके अनुरूप ही परिवर्तन हुआ है।
- 9 व 9 से कम पदों के लिए राज्य सरकार की ओर से अनुमोदित एल शेप रोस्टर व अधिक पदों के लिए 100 पोइंट रोस्टर लागू होता है, इसमें किसी भी भर्ती में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण का प्रावधान नहीं।

पहले बताए थे बैकलॉग, अब निकाला तोड़
वर्ष 2010 में एक आरटीआई में मांगे गए जवाब में विवि ने सात विषयों में एससी व एसटी के 14 पदों को बैकलॉग में बताया था, जबकि इस बार पालना नहीं करने की मांग पर विवि ने वर्ष 2013 का एक पत्र निकाला, जो राज्य सरकार ने जारी किया था, इसमे उल्लेख है कि 20.11.1997 से बैकलॉग रिक्तियों को समाप्त करते हुए नया रोस्टर लागू करने के आदेश दिखा दिए, पत्र मे कार्मिक विभाग से प्राप्त राय के अनुसार ये लिखा गया है।

जारी रहेगा संघर्ष
आरक्षण नियमों की विवि ने खुलेआम अवहेलना की है, यहां तक की कलक्टर की ओर से मांगे गए जवाब भी गलत दिए हैं, हमारी लड़ाई जारी रहेगी, जब तक बैकलॉग व आरक्षण नियमों की पूरी पालना नहीं होती।

डॉ रूपसिंह, अध्यक्ष राजस्थान अनुजाति-जनजाति छात्र संघठन

इनका कहना है
विभिन्न भर्तियों में जारी रोस्टर विशेषज्ञ कमेटी की देखरेख में नियमानुसार हुए है। किसी भी प्रकार से आरक्षण नियमों की अवहेलना इसमें नहीं हुई है।

एचएस भाटी, रजिस्ट्रार सुखाडिय़ा विवि, उदयपुर

Published on:
04 Jun 2018 04:05 pm