- नवगठित जिले सलूम्बर में सीएम ने खोला घोषणाओं को पिटारा, उदयपुर को भी कई सौगातें - जिला बनने के बाद पहली बार मुख्यमंत्री पहुंचे सलूम्बर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से ठीक पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोमवार को एक बार फिर 14 दिन बाद उदयपुर पहुंचे। लगातार दौरों से मेवाड़ अब पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया है। गत दो माह के भीतर लगातार पांचवें दौरे में जहां सीएम गहलोत ने नवगठित जिले सलूम्बर में पहली बार पहुंचकर घोषणाओं की झड़ी लगा दी, वहीं उदयपुर को भी एक और कृषि मंडी की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने उदयपुर में बलीचा िस्थत कृषि मंडी में संभाग स्तरीय किसान महोत्सव का उद्घाटन किया, वहीं सलूम्बर को जिला बनाने के बाद आयोजित धन्यवाद सभा में शिरकत की। सीएम ने कहा कि 25 जुलाई से प्रदेश में महिलाओं को निशुल्क मोबाइल दिए जाएंगे। उन्हें फ्री वाई-फाई की सुविधा दी जाएगी। साथ ही धीरे-धीरे अन्य परिजनों को भी निशुल्क मोबाइल योजना से जोड़ा जाएगा। सीएम ने सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।
--------
सलूम्बर को ये दिया :
- महाराणा प्रताप सराडा-चावंड नगर पालिका
- सेमाल और खरका गांव में पीएचसी
- सलूंबर में कन्या महाविद्यालय
- 5 करोड़ की लागत से रूठी रानी महल और हवा महल जयसमंद के जीर्णोद्धार की घोषणा
- सलूम्बर में स्वतंत्र मंडी की होगी स्थापना
------
उदयपुर को ये दिया :
- उदयपुर के बलीचा में 100 बीघा जमीन पर 50 करोड़ की लागत से नई फल- सब्जी मंडी बनाई जाएगी
- जिले में सीताफल, आम, वनोपज व औषधीय पादपों के अनुसंधान व उत्पादन की आधुनिकतम तकनीक विकसित करने की दृष्टि से तीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाने की घोषणा। कोटडा में सीताफल, झाड़ोल-फलासिया में वन उपज और औषधीय पादपों और लसाडिया में आम के लिए यह केन्द्र खोले जाएंगे।
- गौण मंडी बलीचा को स्वतंत्र मंडी बनाने की घोषणा
-----
प्रधानमंत्री पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री गहलोत ने बलीचा में सभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी जो कहते हैं वह पूरा नहीं करते। उनकी कथनी और करनी में अंतर है। गहलोत ने कहा कि किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर कानून बनाने के लिए उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया, जबकि उनके शासनकाल के नौ वर्ष पूरे हो गए हैं। वह जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब वही इस कानून के लिए मनमोहन सिंह सरकार पर दबाव बना रहे थे, अब जब वह स्वयं प्रधानमंत्री हैं, तो किसानों के हित के लिए ये कानून क्यों नहीं बना रहे।