उदयपुर

रसूख के आवास पर नियमों को ठेंगा…मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि के गेस्ट हाउस के हाल

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रसूख के आवास पर नियमों को ठेंगा...मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि के गेस्ट हाउस के हाल

भुवनेश पण्ड्या/उदयपुर. आम व्यक्ति के लिए नियमों की एक-एक कड़ी और डग-डग नाप जरूरी है, लेकिन जहां रसूख शुरू हो जाए वहां सब कायदे हवा हो जाते हैं। मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि के गेस्ट हाउस में वैसे तो केवल सात दिन नियमित रहने का नियम है, लेकिन दो रसूखदार कई महीनों से इस विवि के गेस्ट हाउस का उपयोग कर रहे हैं, इतना ही नहीं इनमें से एक पर तो हजारों रुपए चढ़ चुके हैं, लेकिन वह इस राशि का चुकाने का नाम तक नहीं ले रहे। इस मामले में कुलपति सब कुछ नियमों से होने की दलील दे रहे हैं।

ये है हाल
यहां सुखाडिय़ा विवि स्थित गेस्ट हाउस में 23 कक्ष है, नियम है कि इस गेस्ट हाउस में कोई भी व्यक्ति अधिकतम सात दिन नियमित रह सकता है, जबकि यहां दो व्यक्ति राजेश दुबे और नीरज रावत कई महीनों से रह रहे हैं।


- राजेश दुबे: अपनी नियुक्ति को लेकर पहले से ही विवादों में चल रहे हैं, इन्हें लेकर लोकायुक्त में जांच चल रही है, लेकिन वह बेरोकटोक इस वर्ष 4 जुलाई से यहां रह रहे हैं। इस पेटे इनका 50 हजार रुपए का बिल बकाया चल रहा है।

- नीरज रावत: यहां प्लेसमेंट का कार्य देख रहे हैं। वे नवम्बर 17 से यहां रह रहे हैं। हालांकि रावत समय-समय पर अपने यहां रहने का बिल जमा करवाते रहते हैं।

ये है राशि
- सिंगल बिस्तर के लिए प्रतिदिन 1100 रुपए जीएसटी अलग

- डबल बिस्तर के लिए प्रतिदिन 1650 रुपए जीएसटी अलग

यदि ऑफिशियल निर्देश है तो इनके लिए यह राशि
- सिंगल बिस्तर के लिए प्रतिदिन 220 रुपए जीएसटी अलग

- डबल बिस्तर के लिए प्रतिदिन 440 रुपए जीएसटी अलग

ये निवासरत हैं ऑफिशियली
ये ऑफिशियली निवासरत हैं, ऐसे में यदि ये ही कक्ष किसी अन्य को दिया जाता तो प्रतिदिन 880 रुपए का फायदा, जबकि डबल बिस्तर पर 1210 रुपए का फायदा हो सकता है।


कुलपति के निर्देश हैं...

इन दोनों व्यक्तियों के लिए कुलपति के निर्देश हैं। इसलिए इन्हें रखा गया है, आमतौर पर सात दिन रहने का नियम हैं। गत वर्ष 45 लाख और इससे पहले 48 लाख रुपए का राजस्व हासिल किया है। अब तक विवि को 25 लाख रुपए दिए हैं, इसके रखरखाव को लेकर हम कभी विवि से बजट नहीं लेते, यहीं से खर्च निकालते हैं।

अशोकसिंह, प्रभारी गेस्ट हाउस
मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि उदयपुर


सब नियमों से ही है...

प्लेसमेंट का कार्य देख रहे रावत को तो बाहर आना-जाना पड़ता है, इसलिए उन्हें यहां रखा गया है, जबकि प्रोफेसर को जल्द ही आवास उपलब्ध होते ही यहां से वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। अतिथि गृह सुविधाओं के लिए है। यहां सब नियमों से ही हो रहा है।
प्रो.जेपी शर्मा, कुलपति एमएलएसयू

Updated on:
10 Oct 2018 06:42 pm
Published on:
10 Oct 2018 06:42 pm