
चंदनसिंह देवड़ा/उदयपुर . मां, मैं हिमा दास hima das जैसे मैडल लाती पर तूूने तो आंख खुलने से पहले ही अनाथ का तमगा डलवा दिया...एक नन्ही सी परी के मन के यही उद्गगार होंगे जिसने आंख भी नहीं खोली थी, उसे मां पालने में छोडकऱ चली गई। मासूम यह भी नहीं जानती कि उसके पास छोड़े खिलौने, कपड़े व बोतल के क्या मायने हैं। वह महसूस कर सकती है तो बस ममता का आंचल, लेकिन विडम्बना है कि जननी उसे पालने में लावारिस छोड़ चली गई। यह बेटी अब शेल्टर होम पहुंच गई, आंखें खोल कर ममता भरे आंचल को तलाश रही है लेकिन वह उसके पास नहीं है। वह बोल तो नहीं पाती लेकिन उसके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा- हे मां, क्या बेटी होना मेरा कसूर था। मुझे तेरी याद आ रही है...तू यों छोड़ कर कहां चली गई। मैं बिना खिलौने के रह लूंगी लेकिन तेरे आंचल का प्यार दे दे।
यह दर्द है उस मासूम बेटी का है जिसे 5 दिन पूर्व एमबी अस्पताल MB Hospital Udaipurपरिसर में लगे पालने में अज्ञात महिला खिलौने और दूध की बोतल के साथ छोड़ कर चली गई थी। इलाज के बाद चिकित्सकों की टीम ने शुक्रवार को बाल कल्याण समिति child welfare commitee के समक्ष पेश किया। बच्ची करीब 10 दिन की है। समिति ने बच्ची को शेल्टर करवा दिया है। बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि बच्ची को जिस तरह से छोड़ा गया, उससे लग रहा है कि बच्ची ने जन्म के बाद आंखें नहीं खोली थी जिससे कहीं उसे अंधी नहीं समझ लिया हो। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की टीम ने इस बच्ची को देखभाल की। 5 दिन के बाद बच्ची ने आंखें खोली है। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डॉ प्रीति जैन ने कहा कि यह विडंबना है कि बच्चियों को जन्म के साथ ही इस तरह छोड़ दिया जाता है ।