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उदयपुर : गांव से ग्लोबल साइंस तक : एआइ और सुपरकंप्यूटिंग से खोजा प्लास्टिक प्रदूषण व जलवायु संकट का समाधान

उदयपुर के डॉ. राघवेंद्र मीणा ने नीदरलैंड से पीएचडी पूरी कर एआई और सुपरकंप्यूटिंग की मदद से प्लास्टिक प्रदूषण व जलवायु परिवर्तन के समाधान पर महत्वपूर्ण शोध किया है। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान को गति देने वाला ओपन-सोर्स एआई सॉफ्टवेयर भी विकसित किया है।
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डॉ. राघवेंद्र मीणा

उदयपुर. छोटे से गांव, सीमित संसाधन और साधारण पृष्ठभूमि… यदि सपने बड़े हों और उन्हें पूरा करने का जुनून हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उदयपुर के गोवर्धन विलास निवासी और केंद्रीय विद्यालय-1 के पूर्व छात्र डॉ. राघवेंद्र मीणा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने 22 जून को नीदरलैंड की विश्व-प्रसिद्ध 'वागेनिंगन यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च' से थ्योरिटिकल एंड कंप्यूटेशनल केमिस्ट्री में अपनी पीएचडी पूरी की है। वर्तमान में वे इसी यूनिवर्सिटी में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं।

डॉ. राघवेंद्र का शोध वर्तमान समय की दो सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों-प्लास्टिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के समाधान पर केंद्रित है। उन्होंने अपने शोध में ऐसे उन्नत पदार्थों और कैटेलिस्ट की खोज की है, जो प्लास्टिक कचरे को उपयोगी रसायनों और ईंधन में बदलने की प्रक्रिया को अत्यधिक प्रभावी बना सकते हैं। साथ ही, उनका शोध हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड गैस को उपयोगी ऊर्जा और रसायनों में परिवर्तित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

विकसित किया ओपन-सोर्स एआइ सॉफ्टवेयर

शोध को अधिक गति देने के लिए डॉ. राघवेंद्र ने ‘एजेंट-मटेरियल्स-साइंस’ नामक एक ओपन-सोर्स एआइ सॉफ्टवेयर भी विकसित किया है। सामान्यतः वैज्ञानिकों को नए पदार्थों और कैटेलिस्ट की खोज के लिए जटिल गणनाएं और प्रयोग करने पड़ते हैं, जिसमें वर्षों का समय लग जाता है। लेकिन यह सॉफ्टवेयर वैज्ञानिक आंकड़ों का तेज गति से विश्लेषण कर संभावित नए पदार्थों की पहचान करने और बेहतर विकल्प सुझाने में मदद करता है। उनके शोध की उच्च गुणवत्ता और संभावनाओं को देखते हुए 'डच रिसर्च काउंसिल' ने उन्हें 'स्नेलियससुपरकंप्यूटर' पर 1.25 करोड़ सीपीयू और 50 हजार जीपीयू घंटे उपलब्ध कराए। इस अत्याधुनिक कंप्यूटिंग सुविधा की अनुमानित लागत करीब दो लाख यूरो (करीब 1.8 करोड़ रुपए) है।

अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में 10 शोध पत्र प्रकाशित

डॉ. राघवेंद्र के 10 शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें से उनके एक विशेष शोध को विश्व प्रसिद्ध ‘चेमकैटचेम’ जर्नल के मुख्य कवर पेज पर स्थान मिला है, जो वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में किसी भी युवा वैज्ञानिक के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

उदयपुर के केवी से शुरुआत...यूरोप पहुंचे

डॉ. राघवेंद्र की स्कूली शिक्षा की शुरुआत उदयपुर से हुई, जहां उन्होंने वर्ष 2004 से 2015 तक केंद्रीय विद्यालय-1 से शिक्षा प्राप्त की। स्कूली दिनों से ही विज्ञान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण उन्होंने 'राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा' जैसी प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति हासिल की। इसके बाद, उन्होंने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे से केमिस्ट्री और फिजिक्स में बीएस-एमएस की संयुक्त डिग्री प्राप्त की, जहां उन्हें भारत सरकार की 'इंस्पायरस्कॉलरशिप' मिली। वर्ष 2019 में उन्हें यूरोप की प्रतिष्ठित 'इरास्मस प्लस फेलोशिप' से नवाजा गया, जिसके तहत उन्होंने फ्रांस की शीर्ष सोरबोन यूनिवर्सिटी, पेरिस से मैटेरियल्स साइंस में मास्टर्स की डिग्री पूरी की और फिर नीदरलैंड से अपनी पीएचडी की राह पकड़ी।

डॉ. राघवेंद्र का बचपन करौली जिले की सपोटरा तहसील के एक छोटे से गांव 'जीरोता' में बीता। उनके दादा-दादी खेती से जुड़े रहे। पिता डॉ. रेखराज मीणा राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, उदयपुर में प्राध्यापक हैं, जबकि मां मौसमी देवी गृहिणी हैं।