
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने 1 वर्ष में 13 पेटेंट प्राप्त किए हैं। जिनमें विगत छह माह में ही विभिन्न अनुसंधान व शोध कार्यो के लिए भारत सरकार से 4 पेटेंट हासिल हुए। बड़ी बात ये है कि राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर के दस पेटेंट हासिल करना आसान नहीं है। एमपीयूएटी ने वेस्ट मटेरियल का सिविल कार्यों में उपयोग, गन्ने को जलाने के बाद उसकी राख का उपयोग जैसे पेटेंट हासिल किए हैं।
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इन विषयों पर किए शोध :
- महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग के सिविल विभाग में वेस्ट मटेरियल का सिविल कंस्ट्रक्शन में उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान पर शोध किया है।
- सिविल विभाग के डॉ त्रिलोक गुप्ता ने सिंगल यूज्ड प्लास्टिक का सफलता पूर्वक उपयोग कर विभाग में ही सड़क का निर्माण किया है। इसी तरह वेस्ट टायर का पेवर ब्लॉक में उपयोग कर मजबूती प्रदान की गई है। गन्ने को जलाने के बाद बची हुई राख का फ्लोर टाइल बनाने की दिशा में कार्य किया है। विभाग के डॉ त्रिलोक गुप्ता ने विगत 1 वर्ष में भारत एवं ऑस्ट्रेलियन सरकार से 9 पेटेंट प्राप्त किए हैं। जिनमें से 3 विगत 3 माह में प्राप्त हुए हैं।- विनोद सहारन ने पौधे आधारित नैनो फॉर्मुलेशन खतरनाक एग्रोकेमिकल (कवकनाशी-कीटनाशक) के उपयोग को 20-30% तक कम कर सकने का पेटेंट लिया है। इसके अलावा विकसित नैनो स्केल बायोपॉलिमर आधारित धीमी गति से रिलीज सैलिसिलिसिड नैनो फॉर्मुलेशन पौधों की बीमारियों के नियंत्रण और अजैविक तनाव के प्रति सहनशीलता के लिए प्राप्त किए हैं।
------रैंकिंग में मिलेगा फायदा
पेटेंट के कारण आई. सी. ए. आर. नई दिल्ली की रैंकिंग में भी फायदा मिलेगा। इन पेटेंट द्वारा विश्वविद्यालय को आय अर्जित करने का मौका मिलेगा तथा साथ ही सभी शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा पेटेंट के लिए उल्लेखनीय कार्य करने के कारण आस्ट्रेलिया सरकार द्वारा भी पेटेंट प्रदान किए गए हैं जो बड़ी उपलब्धि है।
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एक वर्ष में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के 13 पेटेंट हासिल करना पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व की बात है। हम लगातार सही दिशा में कार्यरत हैं। जल्द ही और भी कई उपलिब्धयां हमें मिलेंगी।
डॉ अजीत कुमार कर्नाटक, कुलपति एमपीयूएटी