उदयपुर

सीताफल ने बदली आदिवासी महिलाओं की तकदीर…उदयपुर की इस देन को पीएम मोदी ने भी सराहा

सीताफल ने संवारी आदिवासी महिलाओं की तकदीर
2 min read
mpuat udaipur
पीएम ने जिस तकनीक को सराहा, वह लेकसिटी की देन

मुकेश हिंगड़/उदयपुर . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को पाली के महिला समूह से बातचीत में सीताफल का गूदा निकालने एवं उनके विपणन की जिस तकनीक को सराहा, वह लेकसिटी की देन है। जहां मार्केटिंग पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद कई उत्पाद बाजार में जगह नहीं बना पाते हैं, वहीं इस तकनीक से जंगलों में बहुतायत में होने वाले सीताफल ने अनपढ़ आदिवासी महिलाओं की जिन्दगी बदल दी है। मोदी से बातचीत में इन महिलाओं ने बताया कि उन्होंने महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से ट्रेनिंग ली और वे आज इस मुकाम पर है। उदयपुर संभाग में अरावली की पहाडिय़ों में बहुतायत में सीताफल की पैदावार होती है। आदिवासी सीताफल की खेती में अपनाई जाने वाले तकनीक, इसकी तुड़ाई और उसके बाद की प्रक्रिया के बारे में नहीं जानते थे। वे सीताफल को अपरिपक्व अवस्था में तोडकऱ ठेकेदारों को बेच देते थे या सडक़ किनारे बैठकर खुदरा ब्रिकी कर देते थे, जिससे उन्हें बहुत कम दाम मिलते थे।

तकनीक से किसानों को फायदा
एमपीयूएटी ने ऐसी तकनीक विकसित की जिसमें बगैर किसी नुकसान के कम समय में अधिक गूदा प्राप्त हो सकता है। इससे न तो गूदा खराब होता और न ही उसका रंग बदलता है। मशीन प्रतिदिन 500 से 600 किलोग्राम गूदा निकालती है जबकि एक इंसान एक दिन में 4 किलोग्राम गूदा ही निकाल सकता है।

कस्टर्ड पाउडर की काफी डिमांड
सीताफल के गूदे की बाजार में काफी मांग है। प्रसंस्करित गूदे से तैयार कस्टर्ड पाउडर से आइसक्रीम, शरबत, जैम, रबड़ी, शेक आदि बनाए जाते हैं। बीजों व छिलके का भी दवा के रूप में उपयोग होता है।


हमारी तकनीक कई स्टेट में

कुलपति प्रो. उमाशंकर शर्मा के अनुसार उद्यानिकी विभाग के प्रोफेसर आर.ए.कौशिक व सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील पारीक के नेतृत्व में यह तकनीक विकसित की गई। इसका परिणाम है कि प्रदेश में पाली, पिंडवाड़ा, कुंभलगढ़ सहित करीब दस स्थानों पर और देश में कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात में कस्टर्ड पल्प यूनिट स्थापित कर दिए गए हैं।

Published on:
13 Jul 2018 07:33 pm