
भुवनेश पण्ड्या/उदयपुर. महाराणा भूपाल हॉस्पिटल की इमरजेंसी कार्मिकों के लिए आरामगाह बना हुआ है, जबकि आपात स्थिति से निपटने के लिहाज से यह महत्वपूर्ण सेवाओं में शुमार हैं। तमाम सख्तियों के बावजूद कामचोरी का तरीका ऐसा है कि जिसे कोई आसानी से पकड़ नहीं सकता। राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो पाया कि इमरजेंसी से कुछ दूर स्थित कक्ष संख्या 53 और स्टोर रूम को कार्मिकों ने आरामगाह बना रखा है।
कैमरे में कैद हुए प्रभारी व ट्रॉली मेन
पत्रिका के कैमरे में दो कार्मिक कैद हुए, जिनमें से एक चिकित्सा मंत्री हैल्प डेस्क के प्रभारी विश्वेश्वरदयाल हैं, तो ट्रॉली मैन एक अन्य कक्ष में आराम फरमा रहा था। जब पत्रिका टीम शनिवार दोपहर में वहां पहुंची थी तो कक्ष अन्दर से बंद थे। यही नहीं, वहां ड्यूटी पर तैनात चमनसिंह हस्ताक्षर कर ड्यूटी से गायब रहते हैं, उन्हें यह तक जानकारी नहीं है कि जरूरी सॉल्यूशन व उपकरण इमरजेंसी में उपलब्ध हैं या नहीं। इमरजेंसी का आईसीयू भी आराम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें लगे एसी का उपयोग केवल स्टाफकर्मी करते रहे हैं।
कुर्सी पर नहीं मिलते सीएमओ
हॉस्पिटल की आपात इकाई 24 घंटे चलती है, जहां संभाग के साथ ही समीपवर्ती राज्यों के गंभीर मामले आते हैं। इसके लिए बकायदा हॉस्पिटल ने आपात इकाई के प्रभारी लगा रखे हैं। तीनों पारियों में एक-एक सीएमओ लगाए गए हैं जिनके अधीन एक मेडिसिन, एक सर्जरी व एक ऑर्थो रेजिडेंट होते हैं। एक सीएमओ डॉ इन्द्रनील बनर्जी हैं, जो ज्यादातर समय कुर्सी से गायब रहते हैं। पूछने पर अधीक्षक ने भी स्वीकारा कि बनर्जी निरीक्षण के दौरान अधिकतर समय कुर्सी पर नजर नहीं आए। खास बात यह है कि नर्सिंग इवनिंग सुपरवाइजर रमेश बाबेल को लगा रखा है, जो इकाई में कभी नहीं दिखते हैं। पूछने पर राउण्ड पर होने की बात कही जाती है। बनर्जी से कई बार फोन से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।
नहीं है जरूरी उपकरण व सॉल्यूशन
इमरजेंसी में सर्जिकल ब्लेड, ग्लब्ज, सालबुटामोल सॉल्यूशन उपलब्ध नहीं है। सालबुटामोल अस्थमा के मरीजों के लिए जरूरी है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के परिजनों को उपकरण नहीं होने पर खुद ही खरीद कर लाने होते हैं, जबकि चिकित्सालय स्टोर में इसकी उपलब्धता है।
नर्सिंग प्रभारी चमनसिंह का कहना है कि ये सॉल्यूशन व उपकरण स्टोर में नहीं है, जबकि सब स्टोर कीपर का कहना है कि सर्जिकल ब्लेड, ग्लब्ज, सालबुटामोल सॉल्यूशन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। अब सही कौन और गलत कौन, इसका निर्णय तो चिकित्सालय प्रशासन ही करेगा।
इसलिए नहीं पता
चिकित्सा मंत्री हैल्प डेस्क को पहले तो अलग से बनाया गया था, लेकिन बाद में उसे नर्सिंग स्टेशन में शामिल कर दिया। हैल्प डेस्क को अब भामाशाह काउंटर बना दिया गया है। ऐसे में यह पता नहीं चल पाता है कि नर्सिंग ड्यूटी पर कौन है और हैल्प डेस्क पर कौन कार्यरत है ?
हो सकता है कि आराम कर लिया हो, लेकिन अब ध्यान रखा जाएगा कि नियमित हैल्प डेस्क पर बैठे। इस तरह से कभी आराम नहीं करेंगे। विश्वेश्वर दयाल, प्रभारी चिकित्सा मंत्री हैल्प डेस्क
स्टोर में नहीं, आते ही करेंगे उपलब्ध
ये उपकरण व सॉल्यूशन स्टोर में कुछ दिनों से उपलब्ध नहीं है। हमने पत्र भेज रखा है। ज्यादातर समय मैं स्टोर के काम में व्यस्त होने के कारण कुर्सी पर नहीं मिलता हूं। यह प्रयास रहता है कि मरीजों को परेशानी नहीं हो। -चमनसिंह, नर्सिंग प्रभारी
हमारे पास सर्जिकल ब्लेड, ग्लब्ज, सालबुटामोल सॉल्यूशन पर्याप्त मात्रा में है, यदि कोई नहीं होने की बात कह रहा है तो वह गलत है। जिस-जिस वार्ड से किसी भी प्रकार की कोई डिमांड आती है उसे तत्काल सप्लाई किया जाता है। - करणसिंह, सब स्टोर कीपर, एमबी हॉस्पिटल
यदि कोई ऐसा कर रहा है तो सीसीटीवी फुटेज से देखकर तत्काल निर्णय लेंगे। जो गलत या दोषी है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। सीएमओ के लिए ड्यूटी रूम अलग से बनाया गया है, यदि वे वहां नहीं बैठते हैं तो गलत है। मैंने जब-जब निरीक्षण किया है तब डॉ बनर्जी मुझे भी कुर्सी पर नहीं मिले। नींद निकालने वालों की पूरी जानकारी निकाल कर कड़ा नोटिस देंगे। - डॉ. लाखन पोसवाल, अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल