उदयपुर

उदयपुर के इस बड़़ेे अस्‍पताल के इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड के हाल बदहाल.. न ऑक्सीजन लाइन, ना जरूरी दवाएं..

www.patrika.com/rajasthan-news
2 min read
Oct 23, 2018
EMERGENCY WARD
उदयपुर के इस बड़़ेे अस्‍पताल के इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड के हाल बदहाल.. न ऑक्सीजन लाइन, ना जरूरी दवाएं..

भुवनेश पंड्या/ उदयपुर . संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल चिकित्सालय के इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड में यदि आप किसी गंभीर मरीज को ले जा रहे तो यह जरूरी है कि आपके हाथ-पैरों में ताकत हो क्योंकि आपसे ऑक्सीजन सिलेंडर खिंचवाए जा सकते हैं तो जांच के लिए बाहर जाने पर स्ट्रेचर भी धकेलना पड़ सकता है। कहने को यह पूरे हॉस्पिटल का सबसे महत्वपूर्ण वार्ड माना जाता है, लेकिन यह बदहाल है।

वार्ड में न तो सेन्ट्रलाइज्ड ऑक्सीजन सिस्टम है और ना ही मरीजों के लिए अन्य जरूरी सुविधाएं। खास बात यह है कि मरीजों को जरूरी जीवनरक्षक दवाइयां भी उपलब्ध नहीं होती हैं। हालात यह हैं कि उपचार के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत होती है, लेकिन कोई उसे लाकर लगाने वाला तक नहीं होता है।

-------

अब भी कई मरीजों के लगे हैं सिलेंडर

हॉस्पिटल में प्रवेश करते ही पहला कक्ष वार्ड 101 है, जिसमें कई मरीजों के ऑक्सीजन सिलेंडर लगे हुए हैं। दो मरीजों के परिजनों ने बताया कि वे स्वयं ही एक स्टाफ के साथ ले जाकर ये सिलेंडर लाए हैं। फिलहाल व्हील चेयर भी उपलब्ध नहीं है। यदि किसी को जांच के लिए ले जाना हो तो मरीजों के परिजनों का दम निकल जाता है। वार्ड में केवल दो स्ट्रेचर यहां उपलब्ध हैं, जो नाकाफी है। आउटडोर बंद होते ही इस वार्ड का काम बढ़ जाता है। सर्वाधिक मरीज सीधे इसी वार्ड तक लाए जाते हैं।

----

वार्ड में 25 बिस्तर, लेकिन दवाइयां नाम की भी नहीं

वार्ड में अभी 25 बिस्तर हैं, लेकिन जीवन रक्षक और अन्य जरूरी मानी जाने वाली दवाइयां उपलब्ध नहीं है, जैसे हाइड्रोपोटिसोन, नोर एड्रीनलीन, आन्डेसिट्रोन जैसी करीब दस दवाएं है, जिनकी आपातकाल में जरूरत रहती है, लेकिन ये उपलब्ध नहीं हैं। ये दवाइयां चिकित्सालय में भी उपलब्ध नहीं हैं।

----

कई लिखा-ऑक्सीजन लाइन लगवाओ

इमरजेंसी वार्ड के प्रभारी सुरेन्द्र शर्मा ने चिकित्सालय अधीक्षक को करीब दस बार पत्र लिखा है कि वार्ड में ऑक्सीजन लाइन लगवाओ, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। वार्ड में करीब डेढ़ वर्ष पूर्व निजी कंपनी ने लाइन डालने का मेजरमेंट कर इसका खर्च महज तीन लाख रुपए बताया था।

इसलिए बंद कर दिए दोनों द्वार

हॉस्पिटल में आने वाले इस वार्ड में बिना किसी काम एवं पूछताछ के प्रवेश कर जाते थे, इसलिए लम्बे समय से बरामदे में खुलने वाले दोनों द्वार को बंद करवा रखा है। बाहर से गंभीर मरीज को वार्ड में लाने के लिए यह बेहतर और सुगम प्रवेश मार्ग है मगर सुरक्षाकर्मी नहीं लगाने पड़े, इसलिए ये द्वार बंद करवा दिए।

सेन्ट्रलाइज्ड ऑक्सीजन सिस्टम एक माह में लगा दिया जाएगा। मरीजों से सिलेंडर मंगवाया नहीं जा सकता है। यह प्रयास करते है कि सभी जीवनरक्षक दवाएं समय पर उपलब्ध हो जाएं।

डॉ विनय जोशी, अधीक्षक महाराणा भूपाल चिकित्सालय उदयपुर

Updated on:
23 Oct 2018 02:16 pm
Published on:
23 Oct 2018 02:14 pm