- मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय के हाल - जिम्मेदार नहीं गंभीर हुए तो खमियाजा भुगतेंगे विद्यार्थी
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का विधि महाविद्यालय पांच वर्ष से बिना मान्यता के चल रहा है। हालात ये है कि इस कॉलेज की डिग्री पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया कभी भी सवाल खड़ा कर सकता है। ऐसे में यहां से निकलने वाले डिग्रीधारी वकीलों के भविष्य पर भी संकट आ सकता है। जानकारों के अनुसार किसी भी विधि शिक्षण संस्थान को स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम को बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त होना आवश्यक है, लेकिन इस कॉलेज में वर्ष 2018 के बाद से अब तक ना निरीक्षण करवाया और ना ही मान्यता ली, ये बात दीगर है कि मान्यता के लिए पत्र व्यवहार की कॉलेज दलील दे रहा है।
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बार कॉन्सिल ऑफ इंडिया से मान्यता की प्रक्रियाबार कॉन्सिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार महाविद्यालय में सभी आवश्यक तैयारी करना जरूरी है। निर्धारित प्रकिया से आवदेन पत्र भरकर उस पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव के काउंटर सिग्नेचर करवाना जरूरी है। आवेदन और सबद्धता के लिए आवश्यक शुल्क जमा करवाना होता है, विश्वविद्यालय द्वारा (650000) जमा करवाए जा चुके हैं।
इसके बाद बार कॉन्सिल इंडिया आवेदक महाविद्यालय में निरीक्षण कर अपडेशन पत्र जारी करता है। ऑफलाइन या ऑनलाइन निरीक्षण के बाद संबंधित महाविद्यालय की संबद्धता को 3 साल के लिए बढ़ाया जाता है। सुविवि के लॉ कॉलेज में 2018 के बाद निरीक्षण नहीं हुआ।
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मान्यता न मिलने का बड़ा नुकसान- इस महाविद्यालय से डिग्री लेने वाले स्टूडेंट्स की डिग्री पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो सकता है, क्योंकि राजस्थान से बाहर विद्यार्थियों को महाविद्यालय की संबद्धता का प्रमाण पत्र देना होता है। और प्रमाण पत्र ना होने की स्थिति में आपकी डिग्री को अन्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के बार काउंसिल मान्यता प्रदान नहीं करते।
- होनहार छात्र अपनी उपाधि में बीसीआई की मान्यता होने का उल्लेख और प्रयोग अपने प्रमाण पत्र में किसी भी स्थान पर नहीं कर पाएंगे।
- मान्यता नहीं मिलने के कारण यूजीसी द्वारा नेक ग्रेडिंग में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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लगा सकता है पैनल्टीबीसीआई चाहे तो एमएलएसयू के विधि महाविद्यालय की मान्यता को रद्द कर सकता है या किसी भी प्रकार की पैनल्टी लगा सकता है। महाविद्यालय की अंक तालिका में विश्वविद्यालय कही भीं बीसीआई से मान्यता संबंधी उल्लेख नहीं कर सकता।
- किसी भी कॉलेज के डीन की ये जिम्मेदारी होती है कि वह समय पर इसका निरीक्षण करवाए, लेकिन यहां मान्यता नहीं मिलने का कारण कोरोना काल बताया जा रहा है, जबकि उसे बीतें भी बड़ा समय हो गया।
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डॉक्यूमेंट भेज दिए गए हैं। आगे बात की है, जल्द ही मान्यता मिल जाएगी। बार काउंसिल कह रहा है कि हम ऑनलाइन करवाएंगे। बार काउंसिल सदस्यों की बैठक के बाद ही निरीक्षण संभव हो सकेगा। विद्यार्थियों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है, इसका कारण है कि हमारे पास फिलहाल मान्यता नहीं है, लेकिन बार काउंसिल से सम्बद्धता बनी हुई है।
प्रो राजश्री चौधरी, डीन लॉ कॉलेज सुविवि