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फेक रिव्यू का जाल, फर्जी स्टार रेटिंग से पल्ले पड़ रहे घटिया प्रोडक्ट

कई उपभोक्ताओं का अनुभव है कि 4 से 5 स्टार रेटिंग देखकर खरीदे गए प्रोडक्ट उम्मीद पर खरे नहीं उतरते।

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विशेषज्ञों के अनुसार, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अब फेक रिव्यू का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है। विक्रेता अपने प्रोडक्ट को बेहतर दिखाने के लिए नकली आईडी से रिव्यू पोस्ट करवा रहे हैं या पैसे देकर सकारात्मक फीडबैक लिखवा रहे हैं।

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ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले शहर के कई खरीदार हो रहे गुमराह

उदयपुर. ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, अब ज्यादातर लोग प्रोडक्ट खरीदने से पहले रेटिंग और रिव्यू भी देखने लगे हैं। एक तरह से यह समझदारी भरा फैसला लगता है, मगर अब कई कंपनियां फेक रिव्यू, स्टार रेटिंग डाल रही हैं। या फिर इनको प्रोडक्ट के समर्थन में कॉम्प्रोमाइज किया जा रहा है। ऐसे में अब खरीदी जाने वाल वस्तु या प्रोडक्ट की गुणवत्ता पर संदेह होने लगा है। ऑनलाइन शॉपिंग में 5-स्टार रेटिंग अब भरोसे की गारंटी नहीं रही। शहर में कई उपभोक्ता हाई रेटिंग देखकर प्रोडक्ट खरीद रहे हैं, लेकिन डिलिवरी के बाद उनकी गुणवत्ता उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही। इससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ ठगे जाने का अहसास भी हो रहा है।

रेटिंग के भरोसे खरीदारी, बाद में पछतावा

उदयपुर के कई उपभोक्ताओं का अनुभव है कि 4 से 5 स्टार रेटिंग देखकर खरीदे गए प्रोडक्ट उम्मीद पर खरे नहीं उतरते। शहर में ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जहां प्रोडक्ट की ऑनलाइन छवि और वास्तविक गुणवत्ता में बड़ा अंतर सामने आ रहा है।

फर्जी रिव्यू का बढ़ता नेटवर्क

विशेषज्ञों के अनुसार, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अब फेक रिव्यू का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है। विक्रेता अपने प्रोडक्ट को बेहतर दिखाने के लिए नकली आईडी से रिव्यू पोस्ट करवा रहे हैं या पैसे देकर सकारात्मक फीडबैक लिखवा रहे हैं। इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ रहा है, जो इन रिव्यूज पर भरोसा कर खरीदारी कर लेते हैं।

घटिया प्रोडक्ट्स का बढ़ता असर

फेक रिव्यूज के चलते शहर में भी घटिया और कम गुणवत्ता वाले उत्पादों की बिक्री बढ़ी है। उपभोक्ताओं को प्रोडक्ट मिलने के बाद उसकी गुणवत्ता, टिकाऊपन और उपयोगिता में कमी महसूस हो रही है। इससे न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

उदयपुर जैसे शहरों में ऑनलाइन शॉपिंग तेजी से बढ़ी है, लेकिन लोगों को रेटिंग के साथ रिव्यू की सच्चाई भी परखनी होगी।”रविंद्र सैनी, ई-कॉमर्स विशेषज्ञफेक रिव्यू एक संगठित कारोबार बन चुका है। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो उपभोक्ताओं का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है।

राहुल पुरोहित, एडवोकेट

ऐसे रहें सतर्क

केवल स्टार रेटिंग देखकर फैसला न लें

नेगेटिव और मिक्स्ड रिव्यू भी जरूर पढ़ें- वेरिफाइड बायर’ टैग को प्राथमिकता दें

एक जैसे शब्दों वाले रिव्यू से सावधान रहें

स्थानीय स्तर पर जागरूकता की जरूरत

विशेषज्ञ सुप्रिया सिंह का कहना है कि उदयपुर में उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही, प्रशासन और उपभोक्ता संगठनों को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी, ताकि फेक रिव्यू के इस जाल पर लगाम लगाई जा सके।

ऑनलाइन शॉपिंग: डेटाश्रेणी

रिव्यू देखने वाले 93 प्रतिशत ग्राहक खरीदारी से पहले रिव्यू पढ़ते हैं
रेटिंग चैक करने वाले 41 प्रतिशत लोग हर बार रेटिंग देखते हैं

रिव्यू पर भरोसा

53 प्रतिशत ग्राहकों को रिव्यू भरोसेमंद लगते हैं

रेटिंग पर अविश्वास

65 प्रतिशत लोग रेटिंग पर पूरी तरह भरोसा नहीं करते

फेक रिव्यू अनुभव

56 प्रतिशत ग्राहकों ने फेक या मैनेज्ड रिव्यू देखा

मैंने 4.5 स्टार रेटिंग देखकर हेडफोन खरीदा था, लेकिन वह 10 दिन में ही खराब हो गया। रिव्यू देखकर भरोसा किया था, लेकिन अनुभव बिल्कुल उलट रहा।

रोहन शर्मा, ऑनलाइन शॉपिंग ग्राहक

कई बार प्रोडक्ट की फोटो और रिव्यू इतने अच्छे होते हैं कि लगता है बढ़िया होगा, लेकिन असल में क्वालिटी बहुत खराब निकलती है।

शिप्रा जैन, ऑनलाइन शॉपिंग ग्राहक