
Rajasthan Quartz Industry Crisis (Patrika Photo)
उदयपुर: अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध के कारण राजस्थान की तीन हजार करोड़ की क्वार्ट्ज इंडस्ट्री कठिन दौर में है। उत्पादन 40 फीसदी तक घट गया। इस संकट के बीच एक बड़ा संकट और आने वाला है, जिसका फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथ में है।
अमेरिका घरेलू निर्माताओं के समूह क्वार्ट्ज मैन्यूफैक्चरिंग एलायंस ऑफ अमेरिका ने क्वार्ट्ज इंडस्ट्री पर सेफगॉर्ड ड्यूटी लगाने की मांग की है। इसकी फाइल ट्रंप के पास भेजी जानी है। अगर यह ड्यूटी लागू हो जाती है तो इस इंडस्ट्री पर 50 से 60 फीसदी टैरिफ लगेगा।
इसको लेकर भारतीय क्वार्ट्ज उद्योग महासंघ अपना पक्ष रख चुका है। भारतीय निर्यातकों का मानना है कि ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी के चलते यह ड्यूटी लागू होना लगभग तय है। कुल उत्पादन का 80 फीसदी से ज्यादा उत्पाद अमेरिका भेजे जाते हैं।
क्वार्ट्ज को स्फटिक या बिल्लौर भी कहते हैं। यह सख्त होता है, जो कांच को खरोंच सकता है। इसका उपयोग घड़ियों में समय को सटीक रखने के लिए किया जाता है। रेडियो, कंप्यूटर और मोबाइल फोन के सर्किट में भी इसका उपयोग होता है।
टैरिफ के हटने के बाद अभी 10 फीसदी टैरिफ, 3.67 फीसदी एंटी डंपिंग ड्यूटी दे रहे हैं। लेकिन अगर अमेरिका फिर से 50 प्रतिशत टैरिफ लगा देगा तो स्थिति सिर्फ इंडस्ट्री को बंद करने पर आ सकती है।
-सुनील लूणावत, कोषाध्यक्ष, क्वार्ट्ज इंडस्ट्री एसोसिएशन
क्वार्ट्ज इंडस्ट्री राजस्थान में 8 हजार और मेवाड़ में 3 हजार लोगों को रोजगार दे रही है। माइनिंग, प्लांट, ट्रांसपोर्टेशन आदि को मिलाकर मेवाड़ में 4 से 5 हजार लोग इस उद्योग से आजीविका चलाते हैं। आठ महीने पहले अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लगाने के कारण इसकी कमर पहले ही टूट चुकी है।
वैश्विक संकट के कारण रेजिन केमिकल के दाम दोगुने हो गए, जो पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री से आता है। शिपिंग चार्ज 1.21 लाख से बढ़कर 2.79 लाख प्रति कंटेनर हो गया, जिससे उत्पादन लागत तीन गुना हो गई। अमेरिका की निर्भरता कम करने के लिए पिछले सालों में दूसरे देशों के बाजार खोजे गए, लेकिन फायदा नहीं हुआ।
-मुकेश काबरा, उद्यमी
Updated on:
22 Apr 2026 02:17 pm
Published on:
22 Apr 2026 02:17 pm
