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उदयपुर. राजस्थान के खनन पट्टाधारकों और खनिज उत्पादकों से नियमों की मियाद खत्म होने के बावजूद 'राजस्थान स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट' (आरएसएमईटी) फंड के नाम पर लगातार दोगुनी राशि वसूली जा रही है। विभाग और उसके ऑनलाइन रॉयल्टी सिस्टम की इस बड़ी लापरवाही के कारण प्रदेश के माइनिंग कारोबारियों पर करोड़ों का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
दरअसल, आरएसएमईटी नियम 2020 के नियम 8(3) के अनुसार, छोटे खनिजों के पट्टाधारकों को शुरुआत के 5 वर्षों के लिए रॉयल्टी का 2 प्रतिशत हिस्सा ट्रस्ट फंड में देना था। इसके बाद यह दर घटकर स्वतः ही 1 प्रतिशत होनी तय थी। चूंकि यह नियम 15 सितंबर 2020 को लागू हुआ था, इसलिए इसके 5 वर्ष 14 सितंबर 2025 को पूरे हो चुके हैं। नियम के मुताबिक 15 सितंबर 2025 से ही सभी पट्टाधारकों के लिए यह दर घटकर 1% हो जानी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया।
9 माह में करोड़ों की अवैध वसूली
माइनिंग व्यवसायियों का कहना है कि सरकारी ऑनलाइन पेमेंट और रॉयल्टी कलेक्शन सिस्टम को समय पर अपडेट नहीं किया गया। इसके कारण पिछले करीब 9 महीनों से व्यवसायियों के खातों से 2% की दर से ही पैसा काटा जा रहा है, जो पूरी तरह गैर-कानूनी है।यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ मिनरल प्रोड्यूसर्स के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सोनी का कहना है कि एक तरफ माइनिंग इंडस्ट्री पहले से ही मंदी और विभिन्न टैक्सों की मार झेल रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग की इस सुस्ती के कारण बिना किसी कानूनी आधार के व्यवसायियों से ज्यादा पैसा ऐंठा जा रहा है।
अतिरिक्त वसूला पैसा वापस करे सरकार
सचिव डॉ. हितांशु कौशल का कहना है कि इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक बात पहुंचाई गई है। माइनिंग संगठनों ने मांग की है कि ऑनलाइन सिस्टम को तत्काल दुरुस्त कर दर को 1% किया जाए। साथ ही, 15 सितंबर 2025 के बाद से अब तक जो भी अतिरिक्त राशि कारोबारियों से वसूली गई है, उसका पूरा हिसाब लगाकर उसे पट्टाधारकों को रिफंड किया जाए या उनकी भविष्य की रॉयल्टी में एडजस्ट किया जाए। ऐसा न होने पर कारोबारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।उधर, खनन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अगर समय सीमा के बाद भी 2 फीसदी राॅयल्टी कट रही है तो उसे नियमानुसार वापस कर दिया जाएगा।
Published on:
07 Jun 2026 05:51 pm
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