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उदयपुर : खुद सुधरा फिर बना दूसरों का सहारा, फिर कई युवाओं को मिली नई जिंदगी

उदयपुर के नरपत सिंह चौहान ने नशे की लत से खुद को बाहर निकालकर अब तक 1500 से अधिक युवाओं को नई जिंदगी की राह दिखाई है।
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narpat singh chauhan

नरपत सिंह चौहान

उदयपुर. किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी जीत अपनी कमजोरी पर विजय होती है। उदयपुर के नरपत सिंह चौहान की कहानी इसी जीत का उदाहरण है। उन्होंने नशे की गिरफ्त से खुद को बाहर निकालने के बाद अपनी नई जिंदगी सिर्फ अपने लिए नहीं जी, बल्कि उसे उन युवाओं के नाम कर दिया जो आज भी नशे के अंधेरे में भटक रहे हैं। यही कारण है कि अब तक 1500 से अधिक लोगों को वे नई जिंदगी की राह दिखा चुके हैं।

नरपत सिंह की जिंदगी फिल्मी नहीं, बल्कि वास्तविक संघर्ष की कहानी है। महज तीन माह की उम्र में पिता का साया उठ गया। मां ने कठिन परिस्थितियों में पालन-पोषण किया। लेकिन, युवावस्था में तनाव दूर करने के बहाने शुरू हुई शराब धीरे-धीरे ऐसी लत बन गई, जिसने परिवार, रिश्ते और स्वास्थ्य सब कुछ छीन लिया।हालात इतने बिगड़े कि शरीर गंभीर बीमारी से जूझने लगा। परिवार टूटने की कगार पर था और समाज ने भी दूरी बना ली थी। इलाज के दौरान उन्होंने महसूस किया कि नशा किसी शौक का नहीं, बल्कि एक ऐसी बीमारी का नाम है, जो इंसान की सोच और निर्णय लेने की क्षमता को खत्म कर देती है। स्वस्थ होने के बाद नरपत सिंह ने अलग रास्ता चुना। तय किया कि यदि वे इस दलदल से निकल सकते हैं तो दूसरों को भी निकाला जा सकता है। इसी सोच के साथ आरोग्य सेवा संस्थान से नशा मुक्ति को सामाजिक अभियान का रूप दिया।

स्कूल-कॉलेज तक पहुंच

आज उनका काम केवल नशा छुड़ाने तक सीमित नहीं है। वे लोगों की काउंसलिंग करते हैं, परिवारों को साथ जोड़ते हैं और स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थानों, मोहल्लों में जाकर युवाओं से संवाद करते हैं। नशे के खिलाफ प्रभावी हथियार डर नहीं, बल्कि संवाद और भरोसा है।

कुछ बातें, जो नशा छोड़ने वाले की सबसे बड़ी ताकत

- कहते हैं कि हर व्यक्ति को दूसरा मौका मिलना चाहिए। वे नशे के आदी व्यक्ति को अपराधी नहीं, बल्कि उपचार और अपनापन चाहने वाला मरीज मानते हैं।

- उनकी मुहिम का संदेश भी अलग है। कहते हैं कि युवा यदि अपनी ऊर्जा मेहनत, कौशल और सपनों को पूरा करने में लगाएंगे तो नशे के लिए जगह ही नहीं बचेगी।

- आज नरपत सिंह की पहचान उनके अतीत से नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की मुस्कान से है, जिनके बेटे, भाई या पिता नशे से निकलकर सामान्य जीवन जी रहे हैं।

- नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी सलाह वही दे सकता है, जिसने स्वयं उस पीड़ा को महसूस किया है। यह भरोसा युवाओं को खुलकर समस्या बताने के लिए प्रेरित करता है।

- नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति की नहीं होती, उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। इसलिए अभियान में परिजन की काउंसलिंग भी कराई जाती है।

- परिवार के सदस्यों को समझाया जाता है कि तिरस्कार नहीं, बल्कि धैर्य, संवाद और सहयोग ही नशा छोड़ने वाले व्यक्ति के पुनर्वास की सबसे मजबूत नींव बनते हैं।