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उदयपुर : 138 दिन वक्री रहेंगे शनि, कर्म और न्याय के फल पर रहेगी विशेष नजर

26 जुलाई से शनि देव 138 दिनों के लिए वक्री होकर 11 दिसंबर तक रहेंगे, जिससे कर्म और न्याय के फल पर विशेष प्रभाव पड़ेगा।
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उदयपुर. न्याय के देवता एवं कर्म फल दाता शनि देव 26 जुलाई से 138 दिनों के लिए वक्री हो जाएंगे। वे 11 दिसंबर तक वक्री अवस्था में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह समय- समय पर वक्री, मार्गी, उदय और अस्त होते हैं तथा उनकी बदलती चाल का प्रभाव जनजीवन पर शुभ और अशुभ दोनों रूपों में पड़ता है। शनि की चाल में परिवर्तन को विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि उन्हें कर्म, न्याय और दंड का देवता माना है। मान्यता है कि वे प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्रदान करते हैं। ज्योतिषीय मत के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर शनि का कुप्रभाव प्रभावी नहीं माना जाता।

ज्योतिषाचार्य पं. प्रेमनारायण कुमावत ने बताया कि अभी शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं, जो देवगुरु बृहस्पति की राशि है। वहीं बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित होकर नवमी दृष्टि से मीन राशि को देख रहे हैं। इस कारण शनि के कठोर प्रभावों में कुछ हद तक कमी आने और परिणाम अपेक्षाकृत संतुलित रहने की संभावना मानी जा रही है।

शनि को आयु, कर्म, लोहा, तेल तथा काली वस्तुओं का कारक ग्रह माना है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि की वक्री चाल के दौरान तेल से जुड़े आयात-निर्यात और व्यापार पर असर पड़ सकता है। वैश्विक स्तर पर तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और टकराव की स्थितियां बनने की आशंका है। व्यक्तिगत जीवन में अनावश्यक खर्च, आर्थिक हानि, पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव बढ़ने की आशंका है।

पं. कुमावत के अनुसार शास्त्रों में ऐसे लोगों पर शनि की विशेष कृपा मानी है, जो माता-पिता एवं परिवार का सम्मान करते हैं, सत्य, ईमानदारी और सदाचार का पालन करते हैं। वहीं नशा, छल-कपट, अन्याय और अनैतिक कार्यों में संलग्न लोगों को शनि के कठोर फल मिलने की मान्यता है।

ये उपाय माने जाते हैं शुभ

शनि के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए शनिवार को श्रद्धापूर्वक शनि चालीसा एवं हनुमान चालीसा का पाठ करना, पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करना, उसके नीचे चारमुखी दीपक प्रज्ज्वलित करना तथा श्रमिकों, मजदूरों और जरूरतमंद लोगों की सेवा एवं सहायता करना शुभ माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार इन उपायों से शनि की कृपा प्राप्त होने और जीवन में सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है।

शनि देव: कर्मों के न्यायाधीश

शनि देव हिंदू धर्म में न्याय और कर्मफल के देवता के रूप में पूजनीय हैं। उन्हें नवग्रहों में सबसे प्रभावशाली ग्रह माना जाता है, जो हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनि देव सूर्य और छाया के पुत्र हैं तथा उनका स्वभाव गंभीर, न्यायप्रिय और अनुशासनकारी माना जाता है। उनकी दृष्टि को अत्यंत प्रभावशाली कहा गया है, जो व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन ला सकती है। शनि की साढ़ेसाती और ढैया को जीवन की परीक्षा का समय माना जाता है, लेकिन यह समय व्यक्ति को मजबूत और समझदार भी बनाता है। अच्छे कर्म करने वालों पर शनि देव की विशेष कृपा रहती है, जिससे उन्हें सफलता और सम्मान मिलता है। शनिवार को उनकी पूजा, दान और “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करने से उनके कुप्रभाव को कम किया जा सकता है।