उदयपुर

#padmavati controversy: मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार ने पद्मावती फिल्म को लेकर जताई आपत्ति, केंद्र सरकार और सेंसर बोर्ड को लिखा पत्र

उदयपुर . मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वराजसिंह मेवाड़ ने इतिहास को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए आक्रोश जताया है।

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Nov 13, 2017
padmavati controversy: former rajpariwar wrote letter govt

उदयपुर . मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वराजसिंह मेवाड़ ने फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली पर फिल्म पद्मावती में मेवाड़ के इतिहास को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए आक्रोश जताया है। उन्होंने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में कहा कि फिल्म की अब तक सामने आई कहानी, गानों से लगता है कि उन्होंने सारी हदें पार कर ली है। उसने मेवाड़ के इतिहास से ऐतिहासिक धोखाधड़ी कर व्यावसायिक हितों में उपयोग किया है। भंसाली को फिल्म रिलीज की स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए। विश्वराजसिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सूचना व प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी , एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के अध्यक्ष प्रसून जोशी को पत्र लिखा है।

उन्होंने पत्र में कहा कि फिल्म निर्माता ने स्पष्ट नहीं किया है कि ऐतिहासिक फिल्म की कहानी का स्रोत क्या है। सूफी कवि मल्लिक मोहम्मद जायसी की रचना पद्मावत काल्पनिक है। जायसी ने अपनी रचना में ऐतिहासिक पात्रों के नामों का इस्तेमाल किया है, जो अनुचित है। यह ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सही नहीं है। पत्र में कहा कि फिल्म का कथानक मेवाड़ राजपरिवार और इसके इतिहास से संबंधित है, लेकिन फिल्म निर्माता ने इस संबंध में तथ्य सत्यापित करने के लिए राजपरिवार से संपर्क नहीं किया। फिल्म निर्माता ने तथ्यपरक कथानक के लिए न हमसे पूछा और ना ही हमारे परिवार के नाम का इस्तेमाल करने की स्वीकृति ली। हमारे परिवार के नाम और इतिहास का व्यावसायिक इस्तेमाल किया है। यह पूर्णरूप से व्यक्तिगत घृणा का मामला है।

रानी पद्मावती को फिल्म में गलत तरीके से चित्रित करना पूरे देश की महिलाओं का अपमान है।
अधिवेशन में उठाएंगे मसला सिरोया ने कहा कि वे सोमवार से बेलगावी में शुरु होने वाले विधानमंडल के शीतकालीन अधिवेशन में भी इस मसले को उठाएंगे और सरकार से फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग करेंगे।

दी आंदोलन की चेतावनी
राज्य में विवादित फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए सरकार से अपील करते हुए सिरोया ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने फिल्म के प्रदर्शन को अनुमति दी तो वे लोगों के साथ सडक़ पर उतरेंगे। सिरोया ने उम्मीद जताई कि लोगों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाएंगे।

फिल्मों में गलत चित्रण अस्वीकार्य
सिरोया ने कहा कि फिल्मों में हिंदू राजाओं और रानियों को बुरे और नकारात्मक भूमिका में चित्रित करने का रवैया निंदनीय है और इससे करोड़ों लोगों की भूमिकाएं आहत होती हैं। सिरोया ने कहा कि ऐसी चीजों को कला और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम प्रस्तुत करने की कोशिश की जाती है लेकिन लोगों की भावनाओं का ख्याल नहीं रखा जाता है। सिरोया ने कहा कि जब तक समाज ऐसे गलत प्रयासों के खिलाफ मुखर नहीं होगा, फिल्मों में इतिहास को तोड़-मरोड़ को पेश करने का सिलसिला नहीं थमेगा। सिरोया ने कहा कि कला के नाम पर इतिहास और तथ्यों से खिलवाड़ ना हो इसके लिए भी सरकार को पहल करना चाहिए।

पत्रक बांटे
फिल्म के विरोध में हिन्दू जागरण मंच ने रविवार को शहर के सिनेमाघरों के बाहर पत्रक बांटे। जिला संयोजक देवेंद्र सिंह राठौड़ ने फिल्म का बहिष्कार एवं विरोध करने का आव्हान करते हुए जनता से हस्ताक्षर करवाए।


धरना प्रदर्शन 15 को
महाराणा प्रताप राजतिलक सेवा समिति की ओर से 15 नवम्बर को समिति अध्यक्ष अभिमन्युसिंह झाला के नेतृत्व में कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

Published on:
13 Nov 2017 03:36 pm
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