
बैठक में मौजूद डिप्टी सीएम दिया कुमारी व अन्य नेता। फोटो: पत्रिका
उदयपुर। गोगुंदा के भाजपा में विधायक प्रताप गमेती ने डिप्टी सीएम के सामने आंगनबाड़ियों में मिलने वाले पोषण आहार पर चिंता जताई। गमेती ने उदयपुर संभाग स्तरीय बैठक में डिप्टी सीएम दिया कुमारी से कहा कि आंगनबाड़ियों में मिलने वाले पोषण आहार को जानवर तक नहीं खाते। हम बच्चों को दे देते हैं और लोग घर ले जाकर फेंक देते हैं। इस पर उन्होंने इसकी जांच का आश्वासन दिया।
डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने कहा कि उन्हें न्यूट्री किट की भी शिकायतें मिली है। उन्होंने अफसरों को इसकी भी रेंडम क्वालिटी जांच की हिदायत दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्यों में टालमटोल करने के लिए फटकार लगाई और आखिरी चेतावनी तक दे डाली। मंगलवार को मादड़ी औद्योगिक क्षेत्र स्थित उदयपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मीटिंग हॉल में मंगलवार को संभाग स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक में सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), पर्यटन विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
इसमें डिप्टी सीएम ने विभिन्न योजनाओं और बजट घोषणाओं की स्टेटस रिपोर्ट ली। करीब 2 घंटे चली बैठक में राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़, नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, गोगुन्दा विधायक प्रताप गमेती मौजूद रहे।
बैठक में सबसे पहले पीडब्ल्यूडी विभाग ने प्रजेंटेशन दिया। इसे देख डिप्टी सीएम ने कहा कि उदयपुर संभाग में कार्य की गति बाकी सभी संभागों से बहुत धीमी है, बहुत से प्रोजेक्ट महीनों बाद भी शुरू नहीं हो पाए या फिर उनकी प्रगति धीमी है। डिप्टी सीएम ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों सख्त लहजे में फटकार लगाते हुए कहा कि ये आखिरी चेतावनी है, काम की गति बढ़ाइए नहीं तो सख्त एक्शन लिया जाएगा।
महिला बाल विकास विभाग की बैठक में अधिकारियों ने कहा कि गर्भवती महिलाओं का फेस आधार कार्ड में लगी फोटो से मैच नहीं हो रहा है। इससे बहुत से कार्यों में दिक्कतें आ रही है।
पर्यटक विभाग की बैठक में डिप्टी सीएम ने जॉइंट डायरेक्टर सुनीता सरोज को सही जानकारी रखने की नसीहत दी। दरअसल अधिकारी ने कहा कि महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट की निर्माण एजेंसी आरएसआरडीसी है। डिप्टी सीएम ने टोकते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट की वर्किंग एजेंसी कब तय हुई। इस काम को केंद्र की एजेंसी से करवाना है।
साथ ही कहा कि किसी भी ऐतिहासिक इमारत का जीर्णोद्धार करना हो तो बिना किसी संरक्षण विशेषज्ञ के इमारत को छूना तक नहीं है। उन्होंने पूछा, आपके पास एक्सपर्ट तो हैं ना? उनको साथ लीजिए। पर एक भी अधिकारी एक्सपर्ट का नाम नहीं बता पाए।
Updated on:
06 May 2026 07:47 am
Published on:
06 May 2026 07:44 am
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