
उदयपुर. रक्षाबंधन पर भाई को राखी का लिफाफा नहीं मिलने को न्यायालय ने डाक विभाग की सेवा में दोष मानाते हुए विपक्षी को आदेश दिया कि वह परिवादी को दो माह में हर्जाना राशि व वाद व्यय के आठ हजार रुपए परिवादी को दो माह में अदा करे। हिरणमगरी सेक्टर-4 हाल रतलाम निवासी शालिनी पत्नी कीर्ति प्रकाश जैन ने शास्त्री सर्कल डाकघर जरिए पोस्टमास्टर के खिलाफ परिवाद पेश किया। इसमें बताया कि 10 अगस्त 2018 को रक्षाबंधन पर राखी का लिफाफा रजिस्टर्ड डाक से भाई को रतलाम से भेजा था। भाई को लिफाफा नहीं मिलने पर मुख्य डाकघर रतलाम एवं शास्त्रीसर्कल पर पता किया लेकिन कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दिया।
इंटरनेट पर इंडिया पोस्ट वेबसाइट पर कंसाइनमेंट को सर्च करने पर पता चला कि रतलाम डाकघर से बुक लिफाफा 16 अगस्त को शास्त्रीसर्कल डाकघर पर प्राप्त हो गया लेकिन आर्टिकल की डिलीवरी संबंधी स्टेट्स रिपोर्ट प्रदर्शित नहीं कर पाए। उक्त लिफाफा अभी तक संबंधित पते पर डिलीवर न होना विपक्षी की सेवा में गंभीर त्रुटि है।
सुनवाई के बाद स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व ब्रजेन्द्र सेठ ने सेवा दोष मानते हुए विपक्षी को आदेश दिया कि वह पांच हजार रुपए व वाद खर्च सहित आठ हजार रुपए दो माह में अदा करे।