उदयपुर

ग्रामीण स्वास्थ्य पर भारी, अंधेरे का ‘सन्नाटा, सुविधा के बाद भी यहां आने से कतराते हैं मरीज

PHC प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मांडवी का मामला, रात में इमरजेंसी में सूनी पड़ी रहती है पीएचसी
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ग्रामीण स्वास्थ्य पर भारी, अंधेरे का 'सन्नाटा, सुविधा के बाद भी यहां आने से कतराते हैं मरीज
ग्रामीण स्वास्थ्य पर भारी, अंधेरे का 'सन्नाटा, सुविधा के बाद भी यहां आने से कतराते हैं मरीज

उदयपुर/ पारसोला. PHC ग्रामीण स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर समीपवर्ती ग्राम पंचायत मांडवी व लोढ़ी मांडवी में बनाए गए राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अस्तित्व को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। बेहतर उपचार के अभाव में ग्रामीण जन पीएचसी पर जाने से कतराते हैं। दूसरी ओर रात के समय चिकित्सक की अनुपस्थिति के बीच इस राजकीय परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है। पूर्व सरपंच केशुलाल मीणा, हुरजी भाई, अलखाराम, बक्षीराम सहित अन्य स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चिकित्सा कार्मिकों की अक्सर रहने वाली अनुपस्थिति के कारण रोगी यहां रूख नहीं करते। इसके उलट लोग बेहतर उपचार की आस में धरियावद, पारसोला व मूंगाणा पहुंच जाते हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2012 में उप स्वास्थ्य केंद्र को क्रमोन्नत कर पीएचसी बनाई गई थी। वर्तमान में स्वीकृत पदों के हिसाब से दो चिकित्सक, आयुष प्रभारी, एक मेलनर्स, एसएचवी व एलटी सेवाएं दे रहे हैं। औसत ६० से ज्यादा मरीज चिकित्सालय आते हैं। वहीं डिलेवरी का औसत दो रहता है। नए भवन में चार दीवारी, मोर्चरी जैसी सुविधा भी नहीं है।

सबसेंटर का रूख सीएचसी
खास यह भी है कि पीएचसी क्षेत्र में चार सब सेंटर सिंहाड़, जवाहर नगर, वजपूरा व गोपालपुरा शामिल हैं, जिनकी नजदीकी सामूदायिक स्वसथ्य केंद्र धरियावद से अधिक है। इस कारण अधिकांश मौकों पर मरीज पीएचसी पर आने की बजाए सीएचसी की ओर रूख करते हैं। दूसरी ओर पीएचसी पर वाहन की सुविधा भी नहीं है। नि:शुल्क 280 प्रकार की दवाइयां और 15 प्रकार की जांचें भी लोगों को आकर्षित नहीं करती है।

जाना पड़ता है प्रतापगढ़
पीएचसी भले ही हो। चिकित्सक की अनुपस्थिति में अधिकांश मौकों पर मरीज को लेकर प्रतापगढ़ मुख्यालय ही जाना होता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
ललीता देवी मीणा, सरपंच, ग्राम पंचायत लोढ़ी मांडवी

कहता है सच
केंद्र का नाम: आदर्श पीएचसी, मांडवी
स्थापना तिथि: 11 मार्च 2012
अधीनस्थ सबसेंटर- सिंहाड़ 15 किमी,जवाहर नगर 20 किमी, वजपुरा 10 किमी, गोपालपुरा 7 किमी

पेराफेरी के गांव: सराड़ा, इंटाली, हीरावास, सागवाडिय़ा, करसेलीया, धोलीमगरी, आख्याखेड़ा, गुमानपुरा, चितौडिय़ा, करमाल, कांकरा, सेमलिया सहित करीब 20 गांव से जुड़े 15 हजार लोग पीएचसी के दायरे में आते हैं। PHC

Published on:
26 Sept 2019 06:00 am