यूडीए ने इन तालाब, डेम, कुओं और बावड़ियों के जीर्णोद्धार व सौन्दर्यकरण के लिए 16.03 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं।
उदयपुर. शहर के बीचोंबीच जगप्रसिद्ध झीलों के अलावा अब शहर की पेराफेरी में बसे पारंपरिक जलस्रोत भी आकर्षण का केंद्र बनेंगे। अब तक मुख्य पर्यटन मानचित्र से दूर रहे तालाब, डेम, कुएं और बावड़ियां जल्द ही नए रूप में नजर आएंगे, इससे पर्यटकों को शहर के बाहर भी शांत, प्राकृतिक और विरासत से जुड़ा अनुभव मिलेगा। यह पहल न सिर्फ पर्यटन का दायरा बढ़ाएगी, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती देगी।
इन जलस्त्रोतों को को उदयपुर विकास प्राधिकरण संवारेगा। यूडीए ने इन तालाब, डेम, कुओं और बावड़ियों के जीर्णोद्धार व सौन्दर्यकरण के लिए 16.03 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं।
प्रमुख निर्माण कार्यों का खाका
वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर इतना होगा खर्च
परियोजना
खर्च- लखावली तालाब के फीडर केनाल का विकास एवं सौन्दर्यकरण- 1148.78 लाख
- नाई के नान्देश्वर डेम का सौन्दर्यकरण व विकास
300 लाख- रकमपुरा तालाब व थूर की पाल का विकास 100 लाख
झरणों की सराय तालाब का विकास
50 लाख- अम्बेरी स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर की बावड़ी का जीर्णोद्वार 25 लाख
रुण्डेला तालाब क्षेत्र में ड्रेनेज रोकने के लिए डीपीआर
10 लाख- जोगी तालाब क्षेत्र में ड्रेनेज व सीवरेज पर डीपीआर 20 लाख
कुल प्रस्तावित बजट 16.03 करोड़ रुपए
योजनाओं में पर्यावरण और सौंदर्य पर दिया विशेष ध्यान
- तालाबों के किनारों पर ग्रीन बेल्ट विकसित होगी
- वॉकवे, बैठने की व्यवस्था और व्यू प्वाइंट बनाए जाएंगे
- बावड़ियों को पारंपरिक स्थापत्य शैली में संरक्षित किया जाएगा
- प्राकृतिक जल प्रवाह को बनाए रखते हुए विकास कार्य होंगे
- रात के समय आकर्षण बढ़ाने के लिए सॉफ्ट लाइटिंग और लैंडस्केपिंग की जाएगी
- झीलों के साथ ही आसपास के तालाब, डेम, कुएं और बावड़ियां भी पर्यटन का हिस्सा बनेंगी।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल जलाशयों को सुंदर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें स्थायी और उपयोगी बनाना है। फीडर केनाल सुधार से तालाबों में स्वच्छ जल प्रवाह बढ़ेगा तथा वैज्ञानिक ड्रेनेज सिस्टम से गंदे पानी का प्रवेश रुकेगा, भूजल स्तर में सुधार होगा, आसपास के क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, पर्यटन को भी नया विस्तार मिलेगा।
हेमेन्द्र नागर, यूडीए सचिव