
उदयपुर. प्रदेश में प्रशासन और खान विभाग की सख्ती के दावों के बावजूद अवैध खनन, परिवहन और भंडारण का नेटवर्क लगातार सक्रिय है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश भर में अवैध खनन के 53,707 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन पर कार्रवाई के तहत विभाग ने 501.31 करोड़ रुपए से अधिक की पेनल्टी वसूल की है, जबकि 52,989 वाहन और मशीनरी जब्त की गई है। विभागीय आंकड़े ही यह उजागर कर रहे हैं कि प्रशासनिक कार्रवाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ जुर्माना वसूलने और वाहन जब्ती तक सीमित रह जाता है। इस दौरान दर्ज 6,158 एफआइआर के मुकाबले महज 3,412 गिरफ्तारियां ही हुई हैं। यानी लगभग आधी एफआइआर में मुख्य आरोपी पुलिस और प्रशासन की पकड़ से दूर हैं।
वर्षवार कार्रवाई का लेखा-जोखा (2021-22 से 30 सितंबर 2026 तक)
वर्ष... दर्ज प्रकरण... एफआइआर... जब्त वाहन... जुर्माना(करोड़ में)... गिरफ्तारी
2021-22... 9,073... 1,070... 9,092... 88.84... 719
2022-23 ... 9,372 ... 1,069 ... 9,362 ... 81.81 ... 432 ...
2023-24 ... 9,563 ... 1,219 ... 9,033 ... 108.32 ... 562 ...
2024-25 ... 9,331 ... 801 ... 9,342 ... 67.05 ... 397 ...
2025-26 ... 10,569 ... 1,167 ... 10,403 ... 110.96 ... 734 ...
2026-27 (30 सितंबर तक) ... 5,799 ... 832 ... 5,757 ... 44.33 ... 568 ...
कुल योग ... 53,707 ... 6,158 ... 52,989 ... 501.31 ... 3,412 ..
2026-27 में भी तेज रफ्तार
वर्ष 2025-26 में अवैध खनन के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई दर्ज की गई थी। इस दौरान पहली बार मामलों की संख्या 10 हजार के पार पहुंचकर 10,569 हुई और रेकॉर्ड 110.96 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला गया। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले 6 महीनों (अप्रेल से 30 सितंबर 2026) के आंकड़े बताते हैं कि इस साल कार्रवाई की रफ्तार और अधिक तेज है। महज 6 माह में ही 5,799 मामले दर्ज कर 832 एफआइआर कराई जा चुकी हैं और 568 लोगों को गिरफ्तार किया है।
जुर्माना भरा और फिर सक्रिय
अवैध खनन पर पैनी नजर रखने वाले जानकारों के मुताबिक, विभागीय जब्ती अक्सर सिर्फ डंपर, ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी चालकों तक ही सिमट कर रह जाती है। नियमानुसार निर्धारित जुर्माना जमा कराने के बाद अधिकांश वाहन फिर से छूट जाते हैं। खनन सिंडिकेट के लिए यह पेनल्टी किसी 'ऑपरेशनल कॉस्ट' (कारोबारी खर्च) की तरह बन चुकी है। अरावली शृंखला के संवेदनशील वन क्षेत्रों से लेकर बजरी, मार्बल, मेसनरी स्टोन और चूना पत्थर वाले इलाकों में अनियंत्रित उत्खनन पर्यावरण और भूजल स्तर के लिए गंभीर संकट खड़ा कर रहा है।
कम गिरफ्तारी बनी बड़ी चुनौती
पांच वर्षों में दर्ज 6,158 एफआइआर के सामने महज 3,412 लोगों की गिरफ्तारी ही होना यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि केस दर्ज होने के बाद पुलिस जांच किस स्तर पर पहुंचती है। अधिकांश मामलों में केवल 'अज्ञात चालकों' पर मामला दर्ज होना या मौके से मुख्य ऑपरेटरों का बच निकलना इसकी मुख्य वजह है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अवैध खनन के माफिया पर कड़ा कानूनी शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक केवल चालान और वाहन जब्ती से इस काले कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाना नामुमकिन है।