उदयपुर ग्रामीण विधानसभा से तीन बार के विधायक फूलसिंह मीणा की जीवन यात्रा बताती है कि जज्बा हो तो उम्र, हालात और जिम्मेदारियां भी राह नहीं रोक पातीं। महज 15 साल की उम्र में सातवीं कक्षा के बाद मीणा का स्कूल छूट गया।
उदयपुर। उदयपुर ग्रामीण विधानसभा से तीन बार के विधायक फूलसिंह मीणा की जीवन यात्रा बताती है कि जज्बा हो तो उम्र, हालात और जिम्मेदारियां भी राह नहीं रोक पातीं। महज 15 साल की उम्र में सातवीं कक्षा के बाद मीणा का स्कूल छूट गया। खेतों में काम किया, मजदूरी की। सेना में जाने का सपना था, पर शिक्षा की कमी आड़े आ गई। हालात के सहारे जीवन आगे बढ़ा, समाजसेवा से जुड़ाव हुआ और राजनीति में कदम रख दिया। पार्षद बने, फिर विधायक, लेकिन दिल में कहीं यह टीस बनी रही कि पढ़ाई अधूरी रह गई।
खुद पढ़ नहीं पाए तो संकल्प लिया कि पांचों बेटियों को अच्छी शिक्षा देंगे। बेटियों की पढ़ाई की पैरवी करते-करते एक दिन बेटियों ने ही प्रेरित किया -पापा, आप खुद कम पढ़े-लिखे हो, अब आपको भी पढ़ना पड़ेगा। यही प्रेरणा जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया। 55 साल की उम्र में दसवीं ओपन परीक्षा का फॉर्म भर दिया। इसी बीच राजनीति ने रफ्तार पकड़ी।
विधायक का टिकट मिला, चुनावी व्यस्तताओं के चलते पढ़ाई प्रभावित हुई। तीन पेपर उसी साल पास हुए, बाकी तीन 2016 में। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2017 में 12वीं पास की। 2022 में ग्रेजुएशन और अब 69 वर्ष की उम्र में जनार्दन राय नागर विश्वविद्यालय राजस्थान विद्यापीठ से पीजी अंतिम वर्ष की परीक्षा दे दी।
फूलसिंह मीणा कहते हैं, नाम के आगे ‘डॉक्टर’ लगने तक पढ़ाई जारी रखेंगे। पीजी के बाद पीएचडी करने का इरादा है। इस सफर में शिक्षक बेटी उनकी प्रेरणा बनी हैं। वह खुद भी साथ में पीएचडी करेगी। पढ़ाई के लिए अनुशासन कितना जरूरी है, यह भी विधायक मीणा से सीखा जा सकता है। परीक्षा से पखवाड़ा पहले वे अपना मोबाइल बंद कर देते हैं। सफर में ऑडियो सुनकर और नोट्स पढ़कर तैयारी करते हैं। जरूरत पड़ने पर ड्राइवर या सुरक्षाकर्मी का मोबाइल उपयोग करते हैं।
बेटियों की शिक्षा के लिए वे हरसंभव प्रयासरत हैं। उदयपुर ग्रामीण की हर पंचायत और वार्ड से 10वीं व 12वीं में सर्वाधिक अंक लाने वाली बेटियों को उन्होंने जयपुर तक हवाई यात्रा करवाई है। पीएम नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ से प्रेरित मीणा की इस पहल ने सैकड़ों बेटियों का हौसला बढ़ाया है।