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मौताणा का दंश: 70 परिवारों के 400 से अधिक लोग 18 वर्षों से नहीं लौट पाए अपने गांव

नारायण वडेरा कोटड़ा(उदयपुर). राजस्थान और गुजरात की सीमा से लगे आदिवासी बहुल कोटड़ा क्षेत्र में प्रचलित मौताणा प्रथा के कारण सैकड़ों परिवारों की जिंदगी उजड़ गई है। हालात यह हैं कि इस कुप्रथा के चलते करीब 350 परिवारों के 1200 से अधिक निर्दोष लोगों को अपने घर, जमीन और गांव छोड़कर पलायन करना पड़ा है। […]

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पलायन के बाद घरों की स्थिति।

नारायण वडेरा

कोटड़ा(उदयपुर). राजस्थान और गुजरात की सीमा से लगे आदिवासी बहुल कोटड़ा क्षेत्र में प्रचलित मौताणा प्रथा के कारण सैकड़ों परिवारों की जिंदगी उजड़ गई है। हालात यह हैं कि इस कुप्रथा के चलते करीब 350 परिवारों के 1200 से अधिक निर्दोष लोगों को अपने घर, जमीन और गांव छोड़कर पलायन करना पड़ा है।

इनमें से कई परिवार वर्षों से अपने गांव नहीं लौट पाए हैं। जानकारी के अनुसार 70 परिवारों के 400 से अधिक लोग पिछले 18 वर्षों से अपने गांव वापस नहीं जा सके हैं। पलायन करने वाले परिवार गुजरात, सिरोही, जालोर और सुमेरपुर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में मजदूरी कर किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। कई परिवार सड़क किनारे झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं और बच्चों की पढ़ाई भी बीच में ही छूट चुकी है।

आदिवासी समाज की परंपरागत कबीलाई व्यवस्था में हत्या या गंभीर विवाद के मामलों में मृतक पक्ष की ओर से आरोपी पक्ष पर भारी भरकम जुर्माना (मौताणा) लगाया जाता है। कई बार विवाद बढ़ने पर आरोपी के रिश्तेदारों और अन्य निर्दोष परिवारों तक को गांव छोड़ने का फरमान दे दिया जाता है।

केस-1: झगड़े में युवक की मौत, कई परिवारों को छोड़नापड़ा गांव

झेड़ ग्राम पंचायत के भाटा का पानी गांव में वर्ष 2008 में मांडवा कस्बे में चार लोगों के बीच शराब पीने के दौरान विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि हाथापाई में आलिया नामक युवक की मौत हो गई। मामले में आरोपियों को अदालत से सजा भी हो गई, लेकिन इसके बाद मृतक पक्ष के लोगों ने आरोपी भोजा के परिवार और उनके रिश्तेदारों पर हमला कर दिया। इसके बाद कई परिवारों को गांव छोड़कर पलायन करना पड़ा।

केस-2: जमीन विवाद के बाद चढ़ोतरा, घर और सामान लूटा

वर्ष 2017 में मांडवा थाना क्षेत्र के जूनापादर निवासी बाबूलाल अंगारी का अपने पड़ोसी माना पुत्र जीवा गरासिया से जमीन विवाद को लेकर झगड़ा हो गया। मारपीट में जीवा घायल हो गया, लेकिन ग्रामीणों ने उसे मृत बताकर खाट पर रख बाबूलाल के घर के सामने ले आए। देखते ही देखते ग्रामीण हथियारों से लैस होकर चढ़ोतरा कर बैठे। इस दौरान बाबूलाल के परिवार को घर छोड़कर भागना पड़ा। हमलावरों ने घर में रखे पशु, अनाज और अन्य सामान लूट लिया तथा मकान को विस्फोटक सामग्री से गिरा दिया।

केस-3: हत्या के बाद 245 मकानों में तोड़फोड़

वर्ष 2021 में मांडवा थाना क्षेत्र के रूपणी गांव में आपसी विवाद के दौरान कउचाराम पुत्र कुपलाबुम्बरीया की हत्या हो गई। इस मामले में आरोपियों को जेल भी हो गई, लेकिन इसके बावजूद मृतक पक्ष के लोगों ने कई निर्दोष परिवारों और उनके रिश्तेदारों को गांव छोड़ने का फरमान सुना दिया। तीर-धनुष, तलवार और पत्थरों से 245 मकानों में तोड़फोड़ कर दी गई। इस घटना के बाद करीब एक हजार से अधिक लोग गांव छोड़ने को मजबूर हुए, जबकि 500 से अधिक बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो गई।

न्याय की आस में अधिकारियों के चक्कर

पलायन कर चुके परिवारों का कहना है कि वे पुनर्वास और न्याय की उम्मीद में कई बार पुलिस अधीक्षक और डिप्टी कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।

पुलिस की सख्ती जरूरी

सामाजिक कार्यकर्ता धर्मचंद खैर का कहना है कि मौताणा प्रथा को रोकने के लिए पुलिस की सख्ती बेहद जरूरी है। अक्सर पुलिस मामले को समाज स्तर पर सुलझाने के लिए जाति पंचायत पर छोड़ देती है, जिससे स्थानीय पंच हावी हो जाते हैं और तय जुर्माना भी पीड़ित परिवार तक नहीं पहुंच पाता। इससे विवाद और बढ़ जाता है।

यह बोले पीड़ित

आरोपी लोगों को सजा और जेल हो चुकी है, लेकिन पलायन कर चुके अधिकतर परिवार निर्दोष हैं। पुनर्वास के लिए एसपी और डिप्टी से भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।

कर्माराम बुम्बरीया, पीड़ित

इनका कहना है

ऐसे मामले सामने आए हैं। पुलिस की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और पलायन कर चुके लोगों के पुनर्वास के प्रयास किए जाएंगे।

डूंगर सिंह चूंडावत, पुलिस उप अधीक्षक, कोटड़ा