
चन्दनसिंह देवड़ा/उदयपुर/राजसमंद. राजनीति में वंशवाद की बेल पनपती ही जा रही है। इसी विधानसभा चुनाव में बंटे गए टिकटों पर नजर डालें तो वंशवाद साफ झलकता है। नेता इसे राजनीतिक विरासत बताते हैं, जबकि यह वाकई में वंशवाद है। हर बार एक ही परिवार को टिकट देने से बरसों से संगठन की सेवा कर रहे कार्यकर्ता इस बात कंठित है कि आखिर यह वंशवाद कब तक चलेगा। उदयपुर और राजसमंद की 12 विधानसभा सीटों पर नजर दौड़ाएं तो भाजपा से ज्यादा कांग्रेस में वंशवाद हावी नजर आता है।
इन सीटों पर बरसों से हावी वंशवाद
उदयपुर ग्रामीण
इस सीट से कांग्रेस के खेमराज कटारा विधायक रहे और मंत्री बने। उनके देहांत के बाद उनकी पत्नी सज्जन कटारा दो बार विधायक चुनी गई और इस बार कांग्रेस ने युवाओं को मौका देने के नाम पर उनके पुत्र विवेक कटारा को टिकट दिया है।
वल्लभनगर
उदयपुर की इस हॉट सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे स्व. गुलाब सिंह शक्तावत के पुत्र गजेन्द्रसिंह शक्तावत को तीसरी बार टिकट दिया है। उनके पिता कांग्रेस शासन में प्रदेश के गृहमंत्री रहे और मेवाड़ का प्रतिनिधित्व किया।
सलूम्बर
कांग्रेस ने रघुवीर मीणा को इस विधानसभा सीट पर फिर टिकट दिया। रघुवीर के पिता देवेन्द्र मीणा 3 बार विधायक रहे चुके थे। 2009 के उपचुनाव में रघुवीर की पत्नी बसंती को यहां से चुनाव लड़ाया था। इस बार रघुवीर मैदान में है। एक ही परिवार में टिकट जाने से यहां बगावत हो गई है।
झाड़ोल
इस विधानसभा सीट की बात करें तो यहां पर पूर्व विधायक रहे कुबेर सिंह भजात के पुत्र सुनील भजात का कांग्रेस ने टिकट दिया। भजात परिवार में से किसी को टिकट देने के लिए मोदी लहर में एकमात्र झाड़ोल सीट बचाने वाले हीरालाल दरांगी का टिकट काटा गया।
नाथद्वारा
इस विधानसभा सीट पर भाजपा से कांग्रेस में गए और फिर कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए महेशप्रताप ङ्क्षसह को भाजपा ने टिकट दे दिया। महेश प्रतापङ्क्षसह के चाचा शिवदानसिंह पूर्व विधायक रह चुके थे। हालांकि कल्याणसिंह चौहान के निधन के बाद उनके पुत्र की दावेदारी को नकार भाजपा ने पूर्व विधायक शिवदानसिंह चौहान के भतीजे महेश प्रतापङ्क्षसह पर विश्वास जताया।
भीम :
राजसमंद जिले की इस सीट पर कांगे्रस के पूर्व मंत्री लक्ष्मण सिंह रावत के पुत्र सुदर्शन सिंह को पार्टी ने टिकट दिया है। लक्ष्मण सिंह वर्तमान में कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। खुद लक्ष्मण सिंह व उनकी पत्नी पूर्व जिला प्रमुख बसंता रावत भी टिकट की दौड़ में शामिल थे, लेकिन पार्टी ने उनके बेटे को मौका दे दिया।